सोमवार, 2 नवंबर 2020

धौलपुर प्रजामण्डल आन्दोलन (DHOULAPUR PRAJAMANDAL AANDOLAN)


धौलपुर प्रजामण्डल आन्दोलन 

▶ 1970 ई. में ज्वाला प्रसाद और यमुना प्रसाद ने धौलपुर में आचार सुधारिणी सभा' और 1911 ई. में आर्य समाज' के माध्यम से जन चेतना जागृत करने के प्रयास किये। 

▶ 1918 ई. में स्वामी श्रद्धानंद के नेतृत्व में आर्य समाज ने स्वशासन आदोलन चलाया फलतः आर्य समाज के कई कार्यकर्ताओं को जेल जाना पड़ा। 

▶ 1934 ई. में ज्वाला प्रसाद और जौहरीलाल ने धौलपुर में 'नागरों प्रचारिणी सभा की स्थापना की। सभा के तत्वावधान में पुस्तकालय और वाचनालय खोलकर जनता में राजनीतिक चेतना का प्रयास किया गया। 

▶ 1936 ई. में ज्वालाप्रसाद ने धौलपुर में हरिजनोद्धार आंदोलन चलाया। फलतः सरकार को हरिजन बालकों को सार्वजनिक स्कूलों में पढ़ने की इजाजत देनी पड़ी।

▶ 1936 ई. में कृष्णदत्त पालीवाल, मूलचंद, ज्वाला प्रसाद एवं जवाहरलाल ने 'धौलपुर प्रजामण्डल' की स्थापना की। प्रजामण्डल ने कृष्णदत्त पालीवाल के नेतृत्व में राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापना की माँग की। 

▶14 जुलाई, 1938 को प्रजामण्डल ने राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापित करने, प्रजामण्डल को मान्यता देने तथा इसकी शाखाएं खोलने की अनुमति देने, राजनीतिक बंदियों को जेल से मुक्त करने, आम सभा एवं हड़तालों की स्वीकृति देने को भाँग की। लेकिन सरकार ने प्रजामण्डल की इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

▶ अप्रैल, 1940 में भदई गाँव में पूर्वी राजपूताना के राज्यों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का सम्मेलन हुआ, जिसमें सभी राज्यों में उत्तरदायी शासन स्थापित करने के प्रस्ताव पारित किए गए। लेकिन धौलपुर सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

▶ 1947 ई. में राज्य सरकार ने सभाओं और जुलूसों पर रोक लगा दी । धौलपुर प्रजामण्डल ने राज्य के इन आदेशों की अवहेलना की। भारत छोड़ो' आंदोलन के दौरान धौलपुर में प्रजामण्डल ने आंदोलन चलाया और उत्तरदायी शासन स्थापना को माँग की।

▶ 12 नवम्बर, 1946, को तासीमों गाँव में प्रजामण्डल के अधिवेशन में पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर अमानवीय अत्याचार किये। तासोमों गाँव के लोगों ने प्रजामण्डल की सहायता की थी, अत: गाँव वालों पर गोलियाँ चलाई गई, जिससे किसान ठाकुर छतरसिंह और पंचमसिंह मारे गए राज्य की  दमनात्मक कार्यवाही की सारे देश में आलोचना हुई। 

▶ 17-18 नवम्बर, 1947 को प्रजामण्डल ने राम मनोहर लोहिया की अध्यक्षता में धौलपुर में एक राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में उत्तरदायी शासन की स्थापना, भष्टाचार और कालाबाजारी पर रोक लगाने के प्रस्ताव पारित किए गए। जनमत के दबाव के आगे महाराजा उदयभान सिंह को झुकना पड़ा। शासक ने उत्तरदायी शासन स्थापित करने एवं 'तासीमों काण्ड' की जाँच का आश्वासन दिया।

▶ 18 मार्च, 1948 को धौलपुर 'मत्स्य संघ' का हिस्सा बन गया ।

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