• कठपुतली चित्र

    राजस्थानी कठपुतली नृत्य कला प्रदर्शन

Wednesday, July 21, 2021

कमायचा तत लोक वाद्ययंत्र( "KAMAYACHA" LOK VADHYA YANTRA)

● यह सारंगी के समान वाद्य है, जिसकी बनावट में सारंगी से भिन्नता होती है। सारंगी की तबली लम्बी होती है किन्तु इसकी गोल व लगभग डेढ़ फुट चौड़ी होती है। 

● तबली पर चमड़ा मढ़ा रहता है। तबली की चौड़ाई व गोलाई के कारण इसकी ध्वनि में भारीपन व गूँज होती है।
● इसे बजाने का गज भी सारंगी के गज से लगभग डेढ़ा होता । 
● इसमें तीन मुख्य तार लगे होते हैं जो पशुओं की आंत के होते हैं। साथ ही चार से सात सहायक तार स्टील के तार ब्रिज के ऊपर लगे होते हैं।

● कई कमायचा ऐसे भी होते है जिनमे 27 तार लगे होते हैं। अलग अलग कमायचो में तारो की संख्या में भिन्नता देखी जा सकती है।
● तरबों की खूँटियाँ सब ऊपर की ओर होती हैं। इसकी ऊपरी आकृति बहुत कुछ मराठी सारंगी से मिलती है।
● इसमें एक ओर गुजरातण सारंगी की भाँति केवल सात तरबें होती हैं जो सा से नि तक के स्वरों में मिली रहती हैं।
● कामायचा के मुख्य तार तांत के होते हैं। इसकी तरबों का प्रयोग गज संचालन के साथ किया जाता  है। इसलिए वे घुड़च के ठीक ऊपर से निकाली जाती हैं। 
● इनसे वाद्य की ध्वनि अत्यन्त प्रखर हो जाती है। इस वाद्य का प्रयोग मुस्लिम शेख करते हैं जिन्हें मांगणियार भी कहा जाता है।
● नाथ पंथ के साधु भी भर्तृहरि व गोपीचंद की कथा के गीत कामायचा वाद्य यंत्र के साथ गाते है।
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Wednesday, July 7, 2021

VIDHYA SAMBAL YOJANA विद्या संबल योजना -शिक्षण संस्थाओं / आवासीय विद्यालयों व छात्रावासों में गैस्ट फैकल्टी के रूप में वेतन परअस्थाई शिक्षकों की नियुक्ति

VIDHYA SAMBAL YOJANA विद्या संबल योजना -शिक्षण संस्थाओं / आवासीय विद्यालयों व छात्रावासों में गैस्ट फैकल्टी के रूप में वेतन परअस्थाई शिक्षकों की नियुक्ति 

विभिन्न विभागों में शिक्षण कार्यों में शिक्षकों/ प्रशिक्षकों के रिक्त पद होने के कारण नियमित अध्यापन कार्य में व्यवधान उत्पन्न होता है एवं विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन संस्थानों में अध्यापन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 'विद्या संबल योजना' लागू की जा रही है, जिसके क्रम में निम्नांकित सामान्य निर्देश जारी किए गये हैं।

1. विभाग द्वारा प्रतिवर्ष शैक्षिक सत्र आरंभ होने से पूर्व रिक्त पदों का आंकलन किया जाएगा। इन पदों पर नियमित नियुक्ति हेतु अभ्यर्थना तैयार कर भर्ती हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए भर्ती संस्था को भेजी जाएगी। नियुक्ति प्रक्रिया में विलंब को देखते हुए विभाग नियमों में प्रावधित अत्यावश्क अस्थाई आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया भी पृथक् से आरंभ कर सकेगा।इन दोनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होने में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए विभाग गैस्ट फैकल्टी के माध्यम से अध्यापन कार्य निम्न निर्देशों का पालन करते हुए करा सकेंगे।

2. गैस्ट फैकल्टी केवल स्वीकृत रिक्त पद के विरुद्ध ली जा सकेगी। विभाग का मुख्यालय जिलेवार और संस्थावार गैस्ट फैकल्टी की आवश्यकता का आंकलन कर प्रत्येक जिला मुख्यालय पर विभाग का नोडल अधिकारी मनोनीत कर, यह विवरण नोडल अधिकारी को उपलब्ध कराएगा।


3. संबंधित सेवा नियमों में अंकित योग्यता आदि की पात्रता रखने वाले सेवानिवृत कार्मिक / निजी अभ्यार्थियों को गैस्ट फैकल्टी के रूप में लगाया जा सकेगा।


4. गैस्ट फैकल्टी / चयन प्रक्रिया :

(क) संस्थान प्रधान सीधे ही अपने स्तर संस्था में रिक्त चल रहे पदों पर संबंधित सेवा नियमों में अंकित योग्यता आदि की पात्रता रखने वाले सेवानिवृत कार्मिक/निजी अभ्यर्थियों का परिपत्र में वर्णित दरों पर बजट उपलब्धता की शर्त के अध्यधीन गैस्ट फैकल्टी रख सकेंगे।
अथवा

(ख) जिलास्तरीय समिति के माध्यम से :

I. प्रत्येक जिले में एक जिला स्तरीय समिति होगी जिसके अध्यक्ष जिला कलक्टर अथवा उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी होंगे। इस समिति का सदस्य सचिव संबंधित विभाग का जिला स्तरीय अधिकारी अंथवा विभागीय नोडल अधिकारी होगा ।


II. शैक्षिक सत्र के आरंभ होने से पूर्व जिला मुख्यालय पर उक्त समिति द्वारा सार्वजनिक सूचना तैयार कर निर्धारित योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों से ब्लॉकवार-संस्थावार आवेदन आमंत्रित किये जायेंगे। उक्त समिति निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक परीक्षा में प्राप्त प्राप्तांकों के आधार पर वरीयता सूची तैयार करेगी तथा वरीयता सूची के आधार पर गैस्ट फैकल्टी की सेवाएं वरीयता क्रम में उनकी उपलब्धता के आधार पर ली जायेगी ।


III. चयन समिति का संबंधित विभाग के लिए जिला स्तर पर योग्य अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया जाएगा। प्रत्येक रिक्ति के विरूद्ध यथासंभव 3 अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल ब्लॉकवार होगा जिसमें विषयवार, कक्षावार आवश्यकता का ध्यान रखा जाएगा।


5. गैस्ट फैकल्टी हेतु देय मानदेय की दरें :

विद्यालय/प्रशिक्षण संस्थान :

पद(अध्यापक/प्रशिक्षक)  कक्षाप्रति घंटा मानदेयअधिकतम मासिक मानदेय
ग्रेड-।।।1 से 8300 /-21000 /-
ग्रेड-।।9 से 10350/-25000 /-
ग्रेड-।11 से 12400/-30000 /-
अनुदेशक300 /-21000/-
प्रयोगशाला सहायक300 /-21000/-

विश्वविद्यालय/महाविद्यालय/तकनीकी महाविद्यालय/पॉलिटेक्निक कॉलेज :

पदप्रति घंटा मानदेयअधिकतम मासिक मानदेय
सहायक आचार्य800 /-45000/-
सह आचार्य1000/-52000/-
आचार्य1200/-60000/-
6. गैस्ट फैकल्टी की सेवाएं लिये जाने हेतु विभाग द्वारा समुचित शर्तों का समावेश करते हुए संलग्न प्रारूप अनुसार शपथ पत्र लिया जाना सुनिश्चित किया जावेगा ।

7. गैस्ट फैकल्टी के कार्य की समुचित मॉनिटरिंग की व्यवस्था कर उनके संतोषजनक कार्य संत्यापन के आधार पर भुगतान की कार्यवाही की जावेगी।
8. रिक्त पद भरे जाने पर उपरोक्त व्यवस्था स्वतः समाप्त समझी जावेगी।
9. चूंकि छात्रावासों में शिक्षकों के पद सृजित नहीं होते हैं, अतः छात्रावासों में कठिन विषयों की कोचिंग के लिए. रिक्त पदों संबंधी बाध्यता नहीं होगी। कोचिंग के लिए संस्था प्रधान सीधे ही अपने स्तर से अथवा उक्त चयन प्रक्रिया का पालन करते हुए इस हेतु उपलब्ध बजट प्रावधान सीमा तक तथा उपर वर्णित दरों के अनुसार भुगतान कर सकेंगे।

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Tuesday, July 6, 2021

Samadhishwar Mahadev Temple-Mokalji Temple Chittorgarh fort समाधीश्वर/समिधेश्वर महादेवजी का मन्दिर-मोकलजी का मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग

Samadhishwar Mahadev Temple-Mokalji  Temple Chittorgarh fort समाधीश्वर/समिधेश्वर महादेवजी का मन्दिर-मोकलजी का मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग 


◆ विजय-स्तम्भ के दक्षिण में समिद्धेश्वर महादेव का एक प्राचीन मन्दिर है जिसके निज-मन्दिर में शिवलिंग के पीछे दीवार पर शिव की त्रिमूर्ति है। 
◆ शिव के ये तीन मुख 'सत (सत्यता), रज (वैभव), व 'तम' (क्रोध) के द्योतक हैं। 

समाधीश्वर/समिधेश्वर महादेवजी

◆  शिव को समर्पित इस मन्दिर का निर्माण परमार शासक भोज द्वारा ग्यारहवीं सदी के मध्य में किया था। विक्रम संवत 1485 (1428 ई.) में मोकल ने इस मन्दिर का पुर्ननिर्माण करवाया। 
◆ क्षैतिज योजना में मन्दिर गर्भगृह, अन्तराल, मण्डप के साथ उत्तर, दक्षिण व पश्चिम में सुखमण्डप से युक्त है। मण्डप की छत पिरामिड आकार की है। गर्भगृह में विशाल शिव की त्रिमूर्ति स्थापित है। 
◆ मंदिर के भीतरी एवं बाहय दीवारें देवी-देवताओं की आकृतियों से सुसज्जित है। साथ ही प्रांगण में अनेक छोटे-छोटे प्राचीन मन्दिर स्थित है। मंदिर के दक्षिण से पवित्र गोमुख जलाशय में उतरने हेतु सोपान बने हुए है ।

समाधीश्वर/समिधेश्वर महादेवजी शिलालेख

◆ इस मन्दिर में दो शिलालेख हैं। एक शिलालेख सन् 1150 ई का है जिसके अनुसार गुजरात के सोंलकी कुमारपाल का अजमेर के चौहान अनाजी (अनंगपाल) को परास्त कर चित्तौड़ आना ज्ञात होता है
◆ तथा दूसरा शिलालेख सन् 1428 का महाराणा मोकल के सम्बन्ध में हैं। इस मन्दिर को 'मोकलजी का मन्दिर' भी कहते हैं ।
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Monday, July 5, 2021

Vijay Stambh (jay stambh) chittorgarh fort विजयस्तम्भ ( जयस्तम्भ ) -चित्तौड़गढ़ किला

Vijay Stambh (jay stambh) chittorgarh fort विजयस्तम्भ ( जयस्तम्भ ) -चित्तौड़गढ़ किला

◆चित्तौड़गढ़ किले में 47 फीट वर्गाकार व 10 फीट (लगभग 3मीटर) ऊँचे आधार पर बना 122 फीट (लगभग 34 मीटर) ऊँचा नौ मंजिला यह स्मारक भारतीय स्थापत्य-कला की सुन्दर कारीगरी का प्रतीक है। 
◆ यह स्तम्भ आधार पर 30 फीट (6मीटर) चौड़ा है तथा इसमें ऊपर तक जाने के लिये 157 सीढ़ियां हैं हैं। जो केन्द्रीय दीवार के साथ-साथ घूमती हुई चली गयी हैं। 
◆ इस स्मारक के आन्तरिक तथा बाह्य भागों पर अनेक भारतीय पौराणिक देवी-देवताओं अर्द्धनारीश्वर, उमामहेश्वर, लक्ष्मीनारायण, ब्रह्मा, सावित्री, हरिहरपितामह, व विष्णु के भिन्न रूपों व अवतारों की तथा रामायण और महाभारत के पात्रों आदि. की सैकड़ों मूर्तियाँ खुदी हुई हैं। 
◆ इसके साथ ही देवी और मात्रिका प्रतिमाओं, दिक्पालों, ऋतुओं, नदियों एवं जनजीवन की विविधानेक झांकियों का सुन्दर अंकन प्रस्तुत किया गया है जिससे तत्कालीन शस्त्रास्त्रों नृत्यवादन आदि के वाद्य-यन्त्रों के साथ-साथ सामाजिक जीवन का परिचय प्राप्त किया जा सकता है ।
◆ इन अंकनों के नीचे उत्कीर्ण-लेख, मूर्तियों की विविधता एवं उसके लेख के आधार पर इसे' भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोष' कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

विजय स्तम्भ 

◆ श्री रतनचन्द्र अग्रवाल के अनुसार इस स्तम्भ तथा कुम्मश्याम मन्दिर में उत्कृष्ट कला-कृतियों को मूर्तरूप देने का श्रेय जइता तथा उसके पुत्रों-नापा, पोमा, पूंजा, भूमि, बलराज आदि को है। 
◆ इस स्तम्भ की पांचवी मंजिल में इनकी मूर्तियों भी बनी मिलती हैं। मध्य में जड़ता एक कुर्सी पर बैठा है और पास ही उसके पुत्र नापा, पोमा, पूंजा खड़े हैं। उनकी आकृतियों के नीचे 'शिल्पिनः' खोदकर उनके नाम भी क्रमशः उत्कीर्ण हैं ।
विजय स्तम्भ की सीढ़िया


 ◆ इस स्तम्भ का निर्माणकार्य सन् 1440 में प्रारम्भ होकर सन् 1448 (वि. स. 1505) में सम्पूर्ण हुआ तथा इसकी औपचारिक प्रतिष्ठा वि. स. 1505 माघ कृष्णा दशमी को हुई थी, जैसा की कीर्ति-स्तम्भ की प्रशस्ति के निम्न श्लोक से सिद्ध होता है

'पुण्ये पञ्चदशे शते व्यपगते पञ्चाधिके वत्सरे,

माघ मासि वलक्षपक्षदशमी देवेज्यपुष्यागमे ।

कीर्ति-स्तम्भकायन्नरपतिः श्रीचित्रकूटाचले.

नानानिर्मित निर्जरावतणैर्मेरोर्हसन्तं श्रियम् । (श्लोक संख्या 186) 
◆ इस स्तम्भ का निर्माण महाराजा कुम्भा करवाया था, किन्तु इसके निर्माण ने का निश्चित प्रयोजन कहीं भी उल्लिखित प्राप्त नहीं परम्परा हुआ है ।
◆ जनश्रुति एवं के अनुसार इसका निर्माण मांडू (मालवा) के सुल्तान महमूद खिलजी तथा गुजरात के सुलतान कुतुबद्दीन की संयुक्त सेना पर महाराणा कुम्भा की विजय की स्मृति स्वरूप मानते हैं। 
◆ इतिहास की दृष्टि से यह कथन युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होती क्योंकि महाराणा कुम्भा की यह विजय सन् 1457 में हुई थी। जबकि विजय-स्तम्भ की प्रतिष्ठा सन् 1448 में ही हो चुकी थी। 
◆ यह सम्भव है कि महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुलतान महमूद खिलजी पर अपनी प्रथम विजय की स्मृति में बनवाया हो, क्योंकि महाराणा कुम्भा द्वारा सुलतान महमूद खिलजी को सन् 1437 में परास्त कर उसे चित्तौड़-दुर्ग में बंदी बनाकर रखने का उल्लेख मिलता है।

◆ कुछ विद्वानों की यह भी धारणा है कि उक्त स्तम्भ का निर्माण कुम्भश्याम मन्दिर के सामने विष्णु-स्तम्भ के रूप में हुआ हो जैसा कि देवताओं के निमित्त स्तम्भ निर्माण की परम्परा थी। 
◆ इस स्तम्भ पर उत्कीर्ण मूर्तियों एवं स्थापत्य कला की दृष्टि से यह सम्भव प्रतीत होता है, । किन्तु इसकी स्थिति (कुम्भश्याम मंदिर के सामने न होकर लगभग 100 गज अर्थात 91 मीटर दक्षिण में) एवं शिलालेख इस धारणा की पूर्णरूप से पुष्टि करने में असमर्थ प्रतीत होते हैं ।

विजय स्तम्भ 


◆ श्री ओझाजी ने इस सम्बन्ध में अपना मत इस प्रकार स्पष्ट किया है- "इसके (स्तम्भ) विषय में ऐसा प्रसिद्ध है कि मालवे के सुलतान महमूद खिलजी को प्रथम बार परास्त कर उसकी यादगार में राणा कुम्भा ने अपने इष्ट देव विष्णु के निमित्त यह कीर्तिस्तम्भ बनवाया था।" अत: यह निश्चित है कि इस स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा द्वारा अपनी विजय की स्मृति में ही करवाया गया था और इसी कारण यह ‘विजय-स्तम्भ' (Tower of victory) के नाम से प्रसिद्ध है और विजय का प्रतीक माना जाता है।
◆इस स्तम्भ की ऊपरी छतरी बिजली गिरने से नष्ट हो गई थी जिसका जीर्णोद्वार उदयपुर के महाराणा स्वरूपसिंह जी ने करवाया था ।
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Sunday, July 4, 2021

हिंगलू अहाड़ा के महल चित्तौड़ ( Hinglu ahada ke mahal chittorgarh)

हिंगलू अहाड़ा के महल चित्तौड़

◆ कुकड़ेश्वर मंदिर से आगे बढ़ने पर दाहिनी तरफ सड़क से कुछ दूर बस्ती के उत्तर में, ऊँची चट्टान पर स्थित महल के कुछ खण्डहर दिखाई देते हैं। 

◆ ये महल हिंगलू अहाड़ा के महल के नाम से प्रसिद्ध हैं। पूर्वकाल से 'अहाड़ स्थान पर रहने के कारण मेवाड़ के राणाओं का उपनाम 'अहाड़ा' हुआ और डूंगरपुर तथा बांसवाड़े के राजा भी 'अहाड़ा' कहलाते रहे। 

◆ हिंगलू डूंगरपुर का अहाड़ा सरदार था और इन महलों में रहता था जिससे ये महल 'हिंगलू अहाड़ा के महल' कहलाये।

◆ये " रतनसिंह के महल" के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। ऐसा कहा जाता है कि महाराणा सांगा का पुत्र रतनसिंह (महाराणा रतनसिंह द्वितीय) इन महलों में रहता था जिसके कारण इन्हें रतनसिंह महल कहने लगे ।

◆इन महलों के नीचे ही पूर्व में रतनेश्वर तालाब है जिसके पश्चिमी किनारे पर एक शिवालय है जो 'रतनेश्वर महादेव का मन्दिर' के नाम से प्रसिद्ध  है।

◆हिंगलू अहाड़ा महल से सड़क उत्तर की ओर 'लाखोटा बारी' की ओर जाती है । यह दुर्ग की उत्तरी-पूर्वी दीवार में एक छोटा सा द्वार है। इसी द्वार के पास राठौड़ जयमल की टांग में अकबर की गोली लगी थी । 


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Saturday, July 3, 2021

भपंग-एक अनूठा तत लोक वाद्य यंत्र (Bhapang)

भपंग-एक अनूठा तत लोक वाद्य यंत्र (Bhapang)

● यह  डमरू आकार की लम्बी आल के तुम्बे का बना वाद्य होता है, जिसकी लम्बाई डेढ़ बालिश्त और चौड़ाई दस अंगुल होती है। चार बालिश्त लम्बी लकड़ी तीन अंगुल चौड़े तुम्बे में लगी रहती है। 

भपंग

● तुम्बे के नीचे का भाग खाल से मढ़ दिया जाता है और ऊपर का भाग खाली छोड़ दिया जाता है। 
● खाल के बीच में से तार निकालते हुए एक खूँटी से बाँध दिया जाता है। खूंटी को तानते व ढीला करते हुए इससे विभिन्न ध्वनियाँ निकाली जाती हैं।

भपंग एवं खूंटी 

● यह तत् वाद्य अलवर या मेवात क्षेत्र में बहुत प्रचलित है। जिसके एक सिरे पर चमड़ा मढ़ा होता है। 
●  वादक इस वाद्य के कांख में दबा कर डोर या तांत को खींच कर दूसरे साथ से उस पर लकड़ी के टुकड़े से आघात करता है। 

भपंग पर मढ़ा खाल

●  जहुर खाँ इसके ख्याति प्राप्त वादक हैं।
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Friday, July 2, 2021

"ZyCov-D" - the world's first DNA plasmid covid-19 vaccine "जायकोव-डी"- दुनिया की पहली डीएनए प्लाज्मिड कोविड-19 वैक्सीन

"ZyCov-D" - the world's first DNA plasmid covid-19 vaccine "जायकोव-डी"- दुनिया की पहली डीएनए प्लाज्मिड कोविड-19 वैक्सीन

◆ कोरोना वैक्सीन जायकोव-डी के लिए भारतीय कंपनी जायडस कैंडिला दवा नियामक (डीसीजीआई) से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मांगी है।  

ZYCOV-D


◆ जायकोव-डी दुनिया की पहली डीएनए प्लाज्मिड वैक्सीन है। इसे बिना सुई तकनीक से लगाया जाएगा। 
◆ ये वैक्सीन 12 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित होगी। जायकोव डी संभवतः दुनिया की पहली तीन डोज वाली वैक्सीन होगी। 
◆ मंजूरी मिलने पर ये देश में पांचवीं वैक्सीन होगी। 
◆ यह वेक्सीन सुई के बजाय जेट फार्माजेट इंजेक्टर से लगेगी। तेज प्रेशर के लिए कंप्रेस्ड गैस या स्प्रिंग का इस्तेमाल होगा। 
◆ इंजेक्शन में दवा भरकर उसे एक मशीन के जरिए बाह पर लगाते हैं। मशीन पर लगे बटन को दबाने से पर वैक्सीन की दवा शरीर में  पहुंच जाएगी।
◆ जायकोव-डी के लिए कोल्ड चेन की जरूरी नहीं इसे 2 से 8 डिग्री से. तापमान में रखा जा सकता  है।
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Thursday, July 1, 2021

सुप्रसिद्ध चूंधी गणेश मंदिर जैसलमेर ( Famous Chundhi ganesh temple jaisalmer)

सुप्रसिद्ध चूंधी गणेश मंदिर जैसलमेर ( Famous Chundhi ganesh temple jaisalmer)

◆ राजस्थान के जैसलमेर जिले से 12 किलोमीटर दूर सुप्रसिद्ध चूंधी गणेश जी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूर्ण होती है ।

सुप्रसिद्ध चूंधी गणेश मंदिर जैसलमेर

◆ मंदिर का मुख्य द्वार विशाल पीले पत्थर का बना हुआ है द्वार के दोनों और सफेद संगमरमर की हाथी की मूर्तियां लगी हुई है। 
 चूंधी गणेश जी

◆ द्वार में प्रवेश कर आकर्षक उद्यान से गुजरते हुए एक रास्ता सीढियो से नीचे की तरफ नदी की ओर जाता है। इसी नदी में स्थित है सुप्रसिद्ध चूंधी गणेश जी का पावन मंदिर ।

 चूंधी गणेश मंदिर का मुख्य द्वार

◆ मंदिर की प्रतिमा से जुड़ी कथा के अनुसार, इसका निर्माण किसी शिल्पी ने नहीं किया था। यह स्वत: भूमि से प्रकट हुई थी। बरसात के मौसम में यहां नदी बहती है और प्रतिमा जलमग्न हो जाती है। 

 चूंधी गणेश मंदिर का मुख्य द्वार के बाहर हाथी की प्रतिमा 

◆ मंदिर की छत पर सुंदर कांच की नक्काशी की हुए है।तथा मंदिर का फ़र्श पिले पत्थर का बना हुआ है।
◆ यह मंदिर का करीब 1,400 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि यहां चंवद नामक सिद्ध महात्मा ने कई सालो तक तपस्या की थी।  
 चूंधी गणेश मंदिर का परिसर

◆ वर्तमान में यह स्थान उन्हीं के नाम से चूंधी के नाम से जाना जाता है। यहां अन्य ऋषियों ने भी तपस्या की थी, इसलिए इस स्थान को विशेष पवित्र माना गया है।
◆ यहां प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी को मेला लगता है दूर दूर से भक्तजन अपनी मनोकामना के साथ यहां आते है।तथा पूजा अर्चना करते है। 
कांक नदी 

◆ यहां नदी में बिखरे पत्थरो से भक्त जन अपना मनपसंद घर बनाते है और कामना करते है कि उन्हें भी भगवान गणेश अपना मनपसंद  घर जल्द ही प्रदान करे।

भक्तजनों द्वारा बनाये पत्थरों के घर 

◆ गणेश जी के मंदिर के साथ है यहां महादेव जी, रामदरबार - राम सीताजी ,लक्ष्मण जी,हनुमान जी के मंदिर भी बने हुए है।
◆ मंदिर के दोनों तरफ दो कुएं हैं जिनके बारे में मान्यता है कि इनमें हरिद्वार से मां गंगा का जल आता है। यह भी माना जाता है कि एक बार किसी भक्त का कंगन हरिद्वार में गंगा में गिर गया था, जो बाद में यहां निकल आया था।

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Tuesday, June 29, 2021

RSSB PATWARI EXAM 2021 BEST OF RAJASTHAN GK,QUIZ,TEST SERIES, MODEL PAPER FOR REGULAR PRACTICE AND SUCCESS POINTS

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1.एकाग्रता
2.मेहनत
3.सच्ची लगन
4.शांत वातावरण
5.निरंतर दोहरान/अभ्यास
6.निरोगी काया
7.पर्याप्त निद्रा
8.पढ़ाई में निरंतरता

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Sunday, June 27, 2021

रावण हत्था-भोपो का प्रमुख तत लोक वाद्य यंत्र

रावण हत्था-भोपो का प्रमुख तत लोक वाद्य यंत्र 

◆ रावण हत्था यह राजस्थान का बहुप्रचलित लोक वाद्य है।
भोपों का प्रमुख वाद्य है रावण हत्था 
◆पाबूजी की फड़ पूरे राजस्थान में विख्यात है जिसे भोपे बाँचते हैं। ये भोपे विशेषकर थोरी जाति के होते हैं। भारतीय संस्कृति की इस ऐतिहासिक धरोहर को वर्षों से उन्होंने अपनी परंपरा में संभाल कर रखा और विकसित किया है। फड़ कपड़े पर पाबूजी के जीवन प्रसंगों के चित्रों से युक्त एक पेंटिंग होती है। भोपे पाबूजी के जीवन कथा को इन चित्रों के माध्यम से कहते हैं और गीत भी गाते हैं। फड़ के सामने ये नृत्य भी करते हैं। 
◆ ये गीत रावण हत्था पर गाये जाते हैं जो सारंगीनुमा वाद्य यन्त्र होता है।
◆ इसे बड़े नारियल की कटोरी पर खाल मढ़ कर  बनाया जाता है। 

रावणहत्था  लोक वाद्य यंत्र 

◆ इसकी डांड बाँस की होती है, जिसमें खूंटियाँ लगा दी जाती हैं और नौ तार बाँध दिये जाते हैं। 
◆ ये तार स्टील के न होकर बालों के बने होते हैं तथा इन पर गज चलाकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। 
रावणहत्था में लगा नारियल का खोल

◆ रावणहत्थे का गज घोडे की पूँछ के बालों से निर्मित होता है तथा सारंगी के गज से भिन्न प्रकार का होता है। इसके बाल एकदम ढीले रहते हैं, जिन्हें दाहिने हाथ के अंगूठे से दबाकर कड़ा बनाया जाता है। 
रावणहत्थे का गज

गज के अन्तिम छोर पर घुँघरू बंधे होते हैं जो उसके संचालन के साथ ध्वनि उत्पन्न कर ताल का कार्य भी करते हैं। 
रावणहत्थे के तार

◆ बायें हाथ की अंगुलियों से तार को स्थान-स्थान पर दबाकर स्वर निकाले जाते हैं। इसका मुख्य तार मध्य सप्तक के 'सा' तथा अन्तिम तार मन्द्र 'प' में मिलाया जाता है तथा शेष तार 'सा' से 'नि' तक के स्वरों में मिले रहते हैं। 
रावणहत्थे में लगी खुंटिया 

◆ राजस्थान में प्रचलित रावण हत्थे की विशिष्टता यह है कि इसका मुख्य तार घुड़च से एक कोण बनाता हुआ वाद्य के बाईं ओर निकलकर लम्बी डाँड पर लगी खूँटी से कस दिया जाता है। अतः वायलिन की भाँति बाज के तार को डाँड पर दबाकर स्वर नहीं निकाला जाता वरन् तार पर ही दबाव देकर बजाया जाता है। इस प्रकार से निसृत ध्वनि अधिक मधुर होती है। 
रावणहत्थे में बंधे तार

◆ इस वाद्य को मुख्य रूप से भोपे व भील लोग बजाते हैं। इसके साथ पाबूजी, डूंगजी, जवार जी आदि की कथाएँ गाई जाती हैं।

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Saturday, June 26, 2021

जंतर-तत् लोक वाद्य यंत्र

तत् लोक वाद्य यंत्र -जंतर

◆ यह वाद्य वीणा का प्रारम्भिक रूप कहा जा सकता है। इसकी आकृ वीणा से मिलती है तथा उसी के समान इसमें दो तुम्बे होते हैं। 
जंतर लोक वाद्य यंत्र 

 इसकी डाँड बाँस की होती है जिस पर एक विशेष पशु की खाल के बने 22 पर्दे मोम से चिपकाये जाते हैं। कभी-कभी ये मगर की खाल के भी होते हैं। 
 परदों के ऊपर पाँच या छः तार लगे होते हैं।  तारों को हाथ की अंगुली और अंगूठे के आधार से इस प्रकार अघात करके बजाया जाता है कि ताल भी उसी से ध्वनित होने लगती है। 

गले में लटकाकर जंतर का वादन करते हुए 

 इसका वादन खड़े होकर गले में लटकाकर किया जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से बगड़ावतों की कथा कहने वाले भोपे करते हैं 
 जो पर्दे पर चित्रित कथा के सम्मुख खड़े होकर जन्तर को संगत करते हुए गाकर कहानी कहते हैं। 
 ये लोक देवता देवनारायण जी के भजन और गीत भी इसके साथ गाते हैं। 
 मेवाड़ और बदनौर, नेगड़िया, सवाई भोज आदि क्षेत्रों के भोपे इसके वादन में कुशल  है।
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सारंगी-राजस्थान का प्रमुख तत् लोक वाद्य यंत्र

राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य यंत्र-सारंगी 

सारंगी-

◆ तत् वाद्यों में सारंगी श्रेष्ठ मानी जाती है। 
◆ यह तून, सागवान, कैर या रोहिड़े की लकड़ी से बनाई जाती है। 
◆ इसमें कुल 27 तार होते हैं तथा ऊपर की तांतें बकरे की आंतों से बनी होती हैं। 
सिंधी सारंगी

◆ इसका वादन गज से किया जाता है जो घोड़े की पूँछ के बालों से निर्मित होता है। इसे बिरोजा पर घिसकर बजाने पर ही तारों से ध्वनि उत्पन्न होती है।
◆ सारंगी के ऊपर लगी खूँटियों को झीले कहा जाता है।
◆ राजस्थान में दो प्रकार की सारंगियाँ प्रचलित हैं- सिन्धी सारंगी व गुजरातण सारंगी। 
सारंगी में लगे तार

◆सिन्धी सारंगी में तारों की संख्या अधिक होती है तथा यह सारंगी का उन्नत व विकसित रूप है। इसकी बनावट और लम्बाई-चौड़ाई अन्य सारंगियों से भिन्न है। 
सारंगी में लगी खूंटियां

◆गुजरातण सारंगी इसका छोटा रूप है, जिसमें तारों की संख्या केवल सात होती है। इन सारंगियों में मुख्य तार स्टील का होता है, जबकि शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त सारंगी में तांत होती है। इसी कारण इनका आधार स्वर ऊँचा होता है। 
सारंगी का बकरे की खाल से मंढा भाग

◆ इन सारंगियों का प्रयोग मुख्य रूप से जैसलमेर और बाड़मेर के लंगा जाति के लोग करते हैं। 
◆ मरुधरा में दिलरुबा सारंगी भी बजाई जाती है। वैसे दिलरुबा सारंगी पाकिस्तान  के  सिंध प्रांत में लोकप्रिय वाद्य है, परंतु जैसलमेर ज़िले में सिंधी मुसलमान रहते हैं, इसलिए यह वाद्य काफ़ी लोकप्रिय है।
◆ मरुक्षेत्र में जोगी लोग सारंगी के साथ गोपीचन्द, भरथरी, सुल्तान निहालदे आदि के ख्याल गाते हैं। 
◆ मेवाड़ में गड़रियों के भाट भी सारंगी-वादन में निपुण होते हैं।


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राजस्थान सरकार की "मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना" (Mukhyamantri corona sahayata yojana)

राजस्थान सरकार की "मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना"  (Mukhyamantri corona sahayata yojana)

1. योजना का उद्देश्यः

कोरोना महामारी से अनाथ हुऐ बच्चों, विधवा महिलाओं एवं उनके बच्चों को राज्य सरकार द्वारा आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक संबल प्रदान करना है।

2. योजना का विस्तार:

● यह योजना संपूर्ण राजस्थान राज्य में लागू होगी।

3. परिभाषा:

 अनाथ बालक / बालिका से तात्पर्य ऐसे बालक/बालिका से है जिनके : 
1.जैविक / दत्तक ग्राही माता-पिता (दोनों) की कोरोना के कारण मृत्यु  है या
2.माता / पिता में से किसी एक की मृत्यु पूर्व में हो चुकी है तथा दूसरे की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है। 

 विधवा महिला से तात्पर्य ऐसी महिला से है जिसके पति की मृत्यु कोरोना से हो गई है।

 अनाथ बालक/बालिका हेतु पालनकर्ता (संरक्षक) से तात्पर्य जिला कलक्टर द्वारा ऐसे बालक / बालिका की देखरेख और पालन-पोषण हेतु उदघोषित व्यक्ति से है।

 कोविड-19 के कारण मृत्यु का तात्पर्य 01 मार्च, 2020 के पश्चात् कोरोना बीमारी से हुई मृत्यु से है एवं जिसे जिला कलक्टर द्वारा प्रमाणित किया गया।

 जिला स्तरीय अधिकारी से तात्पर्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जिले में इस रूप में नियुक्त / पदस्थापित विभाग के किसी भी अधिकारी से है। चाहें उसकी रैंक या वेतनमान कुछ भी हो।

4. पात्रता :

 योजनान्तर्गत जिला कलक्टर द्वारा प्रमाणन के आधार पर कोरोना बीमारी से मृत्यु होने पर अनाथ बालक/बालिका तथा विधवा महिला व उनके बच्चे अनुदान / आर्थिक / अन्य सहायता के पात्र होंगे। 

● अनाथ बालक / बालिका / विधवा महिला व उसके बच्चे योजनान्तर्गत वर्णित अनुदान / आर्थिक सहायता के अतिरिक्त भारत सरकार व राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के तहत लाभ के पात्र हो सकेंगें।
i. अनाथ बालक / बालिका व विधवा महिलाओं के बच्चे पालनहार योजना के तहत् आर्थिक सहायता के पात्र नहीं होंगे पालनहार योजना में वस्त्र, पाठ्य पुस्तकें आदि के लिए दी जाने वाली राशि रूपये 2000/- प्रति वर्ष एक मुश्त देय होगी।
ii. कोरोना के कारण विधवा महिला कोरोना विधवा पेंशन के अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र नहीं होंगी।

 अनाथ बालक / बालिका तथा विधवा महिलाएँ राजस्थान राज्य के मूल निवासी हो अथवा कम से कम तीन वर्ष से राजस्थान राज्य में निवासरत हो। 

 अनाथ बालक / बालिका तथा विधवा महिला के परिवार द्वारा कोरोना योद्धा योजना का लाभ प्राप्त करने की स्थिति में पात्र नहीं होंगे।

 अनाथ बालक / बालिका व विधवा के बच्चों के मृतक माता पिता व विधवा के पति के राजकीय सेवा या राजकीय उपक्रम के स्थाई कार्मिक होने की स्थिति में वे राज्य योजना के लाभ के पात्र नहीं होंगे।

 अनाथ बालक / बालिका व विधवा महिलाओं के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र / विद्यालय में जाना आवश्यक होगा। 

 विधवा महिला की कोरोना विधवा पेंशन निम्नांकित परिस्थितियों में निरस्त की जावेगी
1.1 विधवा महिला की स्वयं की राजकीय सेवा में नियुक्ति होने पर
1.2 विधवा महिला द्वारा पुनर्विवाह किये जाने पर ज. कोरोना के कारण हुई विधवा महिला के लिए अधिकतम आय तथा आयु की सीमा निर्धारित नहीं है।

5. प्राधिकृत अधिकारी :

 योजनान्तर्गत कोरोना बीमारी से हुई मृत्यु के प्रमाणन हेतु जिला कलक्टर अधिकृत होंगे। इस कार्य हेतु जिला कलक्टर द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के जिलाधिकारी, सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आदि से चिन्हीकरण कार्य सम्बन्धित सूचियाँ तैयार करने व अन्य आवश्यक सहयोग लिया जा सकेगा।

 कोरोना बीमारी से हुई मृत्यु का प्रमाणन करने के सम्बन्ध में जिला कलक्टर का निर्णय अंतिम होगा।

6. अनुदान / आर्थिक सहायता

योजनान्तर्गत पात्रता रखने वाले अनाथ बालक / बालिका तथा विधवा महिला एवं उनके बच्चों हेतु निम्नानुसार निर्धारित अनुदान / आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी मुख्यमंत्री कोरोना बाल सहायता (अनाथ बालक / बालिका हेतु)

(अ.) आर्थिक सहायता

 प्रत्येक बालक / बालिका की तत्काल आवश्यकता हेतु राशि रूपए 1,00,000/ (एक लाख रूपए) का एकमुश्त अनुदान (Ex-gratia) दिया जायेगा। 

 प्रत्येक बालक बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक राशि रुपए 2500/- (दो हजार पांच सौ रूपए) प्रतिमाह प्रति बालक / बालिका प्रदान किये जायेंगे।

 प्रत्येक बालक/बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर राशि रूपए 5,00,000/- ( पांच लाख रूपए) की एकमुश्त सहायता दी जावेगी। उपरोक्त राशि अनाथ बालक/बालिका के बैंक खाते में हस्तान्तरित की जावेगी।

(ब) शैक्षणिक / अन्य सहायता

 कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा राजकीय आवासीय विद्यालय / छात्रावास / विद्यालय के माध्यम से दी जाएगी।
 
 कॉलेज में अध्ययन करने वाली छात्राओं को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में प्राथमिकता से प्रवेश दिया जाएगा। 

 कॉलेज में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिये आवासीय सुविधाओं हेतु अम्बेडकर डीबीटी वाउचर योजना का लाभ दिया जाएगा। इनकी पात्रता हेतु कोई अन्य शर्ते यथा जाति, आय इत्यादि लागू नहीं होगी। 

 मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के अन्तर्गत बेरोजगारी भत्ता दिए जाने में प्राथमिकता से लाभ दिया जाएगा।


मुख्यमंत्री कोरोना विधवा सहायता (विधवा महिला हेतु)

 विधवा महिला को राशि रूपए 1,00,000/- (एक लाख रूपए) एकमुश्त अनुदान Ex-gratia दिया जाएगा। 

 विधवा महिला को उसकी पेंशन हेतु पात्रता धारित करने की अवधि में आजीवन राशि रूपए 1500/- (एक हजार पांच सौ रूपए) प्रति माह पेंशन प्रदान की जाएगी।


मुख्यमंत्री कोरोना पालनहार सहायता (विधवा महिला के बालक / बालिका हेतु)

 विधवा महिला के बालक/बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक राशि रूपए 1000/- (एक हजार रूपए प्रतिमाह प्रति बालक / बालिका दिया जाएगा। 

 विधवा महिला के बालक/बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक विद्यालय पौशाक, पाठ्य पुस्तकें आदि हेतु राशि रूपए 2000 / - ( दो हजार रूपए) प्रति बालक / बालिका एकमुश्त वार्षिक अनुदान दिया जाएगा।

7. चयन प्रक्रिया / अनुदान स्वीकृतिः

 जिला कलक्टर द्वारा जिले में कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों, विधवा महिलाओं एवं उनके बच्चों का चिन्हीकरण करवाया जाएगा।

 ऐसे चिन्हित पात्र लाभार्थियों को जिला कलक्टर द्वारा प्रमाणन कर 07 दिवस में परिशिष्ट-"अ","ब""स" में भुगतान स्वीकृति आदेश जारी किये जायेगे।

 जिला कलक्टर द्वारा जारी की गई स्वीकृति के आधार पर संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा अनुदान / आर्थिक सहायता का भुगतान डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी के खाते में किया जाएगा।

 अनाथ बालक / बालिका के प्रकरण में राशि का भुगतान पालनहार एवं बच्चों के संयुक्त बैंक खाते में किया जाएगा

 विधवा महिला व उनके बच्चों के प्रकरण में राशि का भुगतान विधवा महिला के बैंक खाते में किया जाएगा।

 योजनान्तर्गत लाभान्वित अनाथ बच्चों, विधवा महिलाओं एवं उनके बच्चों के वार्षिक स्तर पर जीवित होने संबंधी सत्यापन के आधार पर नियमित रूप से भुगतान किया जायेगा।

8. भुगतान मदः

 योजनान्तर्गत एकमुश्त तत्काल सहायता, पेंशन / सहायता राशि का भुगतान मुख्यमंत्री सहायता कोष में इस हेतु उपलब्ध राशि में से किया जाएगा।

● ऐसे बालक बालिका जो बाल गृहों में आवासरत है या होंगे उनकी स्वीकृत राशि को बालक / बालिका का बैंक खाता खुलवाकर एकमुश्त राशि का ही भुगतान किया जा सकेगा।

9. योजना की मॉनीटरिंग एवं बजट आवंटनः

योजना के क्रियान्वयन मॉनीटरिंग एवं आवंटन की कार्यवाही बजट आयुक्त / निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की अनुमति से प्रभारी अधिकारी द्वारा की जायेगी।

10. विविध:

● प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में भुगतान की कार्यवाही की जायेगी। ख योजना का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया जायेगा।

11. नियमों में शिथिलताः

● इन दिशा निर्देशों की व्याख्या के लिये शासन सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सक्षम होंगे।
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Thursday, June 24, 2021

राजस्थान में विशेष योग्यजन कल्याणार्थ संचालित प्रमुख योजनायें

राजस्थान में विशेष योग्यजन कल्याणार्थ संचालित प्रमुख योजनायें

1. पेंशन योजना:

पात्रता -  परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 48000/- रूपये तथा शहरी क्षेत्र में 60000/रुपये।
परिलाभ-  0 से 8 वर्ष तक की आयु 250/- रुपये प्रतिमाह 8 से 75 की आयु तक 500/ रुपये प्रतिमाह एवं 75 वर्ष से ऊपर होने पर 750/- रुपये प्रतिमाह पेंशन य (01 जुलाई, 2017 से सभी उम्र के लाभार्थियों को 750/- रूपये प्रतिमाह)

2. छात्रवृत्ति योजना

पात्रता- ऐसे छात्र जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.00 लाख रुपये से कम हो को कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को विभाग द्वारा छात्रवृत्ति देय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कक्षा 9 से कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों, जिनके परिवार की आय 2.00 लाख तक हो एवं कक्षा 11 से डिप्लोमा डिग्री लेवल तक के छात्र, जिनके परिवार की आय 2.50 लाख तक हो एवं उच्च शिक्षा हेतु अध्ययनरत छात्र-छात्राओं, जिनके परिवार की आय 6.00 लाख तक हो ऐसे छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। 
परिलाभ- नियमानुसार अनुरक्षण भत्ता एवं फीस का पुनर्भरण किया जाता है।

3. मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना

पात्रता -विशेष योग्यजनों जिनकी आयु 18 से 55 वर्ष के बीच हो तथा जिनकी स्वयं की एवं परिवार की  वार्षिक आय 2.00 लाख रुपये तक हो।
परिलाभ- स्वयं का स्वरोजगार प्रारम्भ करने के लिए 5.00 लाख रुपये की राशि ऋण के रूप में उपलब्ध करवाना जिस पर ऋण का 50 प्रतिशत (अधिकतम 50 हजार तक) राशि अनुदान के रूप में देय


4. सुखद दाम्पत्य विवाह अनुदान योजना

पात्रता -विशेष योग्यजन युवक/युवतियों को जिनके परिवार की वार्षिक आय 50000/- रुपये तक हो
परिलाभ- ऐसे युवक युवतियों द्वारा विवाह करने पर रुपये 25,000/- प्रति दम्पत्ति आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना बजट घोषणा वर्ष 2017-18 के तहत उक्त राशि को 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया जो दिनांक 22.05.2017 के बाद होने वाले विवाह के लिए प्रभावी है।

5. संयुक्त सहायता, कृत्रिम अंग / उपकरण हेतु अनुदान योजना

पात्रता- विशेष योग्यजनों, जिनका परिवार आयकर दाता नहीं हो
परिलाभ-स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता एवं शारीरिक कमी को पूर्ण करने हेतु कृत्रिम अंग/उपकरण के लिए रुपये 10,000/- (दस हजार) तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना

6. विशेष योग्यजन अनुप्रति योजना 

पात्रता- विशेष योग्यजन छात्र-छात्रायें जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.00 लाख रुपये तक एवं संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की सूचीबद्ध शैक्षणिक संस्थाओं तथा राज्य के राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय/ चिकित्या महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर
परिलाभ- सिविल सेवा परीक्षा हेतु राशि रुपये 1.00 लाख, राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा हेतु 50 हजार रुपये तथा IIT, IIMS, राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल कॉलेज इत्यादि शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेशित होने वाले अभ्यर्थियों को 50 हजार रुपये एवं राज्य के राजकीय इंजिनियरिंग कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेशित होने वाले अभ्यर्थियों को 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देय।

7. विशेष योग्यजन पालनहार योजना

पात्रता -विशेष योग्यजन माता पिता के बच्चे विशेष योग्यजन के परिवार का वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक नहीं हो।
परिलाभ- बच्चों को 0 से 6 वर्ष की आयु तक 500/- रूपये प्रतिमाह एवं 6 वर्ष से 18 वर्ष तक की आयु तक 1000/- रूपये प्रतिमाह अनुदान देय बच्चे को दो वर्ष से पांच वर्ष की आयु के बीच आंगनबाड़ी / स्कूल जाना एवं 6 वर्ष की आयु के बाद विद्यालय में अध्ययनरत होना अनिवार्य 

8. आस्था योजना 

पात्रता- ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक व्यक्तियों का के विशेष योग्यजन होना तथा परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख हो, ऐसे परिवारों को आस्था कार्ड जारी किया जाना
परिलाभ- आस्था कार्डचारी परिवार को सम्बन्धित विभाग द्वारा बी.पी.एल. के समकक्ष सुविधा उपलब्ध करवाना।
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Tuesday, June 22, 2021

मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा/जांच योजना(MUKHYAMANTRI NIHSHULK DAWA/JANCH YOJANA)

मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना

◆ 'मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना' 2 अक्टूबर, 2011 को लागू की गई थी। 
◆ इस योजना के अन्तर्गत चिकित्सा महाविद्यालय, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर आने वाले सभी अन्तरंग एवं बहिरंग रोगियों को अधिकांशतः प्रयोग में आने वाली आवश्यक दवाईयाँ निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। 
◆ राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (आर.एस.एम.सी.) का गठन चिकित्सा विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए दवाईयां, शल्य चिकित्सा औजार और टांके की खरीद के लिए एक केन्द्रीय खरीद एजेन्सी के रूप में किया गया है। 
◆ आर.एस. एम. सी. राज्य के सभी 33 जिलों में स्थापित जिला ड्रग वेयर हाउस (डी.डी.डबल्यू.एच.) के माध्यम से सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को दवाईयों की आपूर्ति कर रहा है। 
◆ वर्ष 2020-21 में आवश्यक दवा सूची में 04 नई औषधियाँ शामिल की गई है। वर्तमान में आवश्यक दवा सूची में दवाएं 709 से बढ़ाकर 713 तथा 181 सर्जिकल्स एवं 77 सूचर्स सूचीबद्ध हैं। 
◆ दवाईयों की गुणवत्ता की जांच ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्रीज द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। राजकीय चिकित्सा संस्थानों में संचालित निःशुल्क दवा वितरण केन्द्रों पर उपलब्ध कराई जा रही दवाईयों की सूची प्रदर्शित की गई है। बहिरंग रोगियों हेतु दवा वितरण केन्द्र के समयानुसार तथा अन्तरंग एवं आपातकालीन रोगियों के लिए दवा की उपलब्धता 24 घण्टे सुनिश्चित की गई है। इस योजना में जटिल एवं गम्भीर बीमारी के लिए भी दवाईयां उपलब्ध हैं। 
◆ वित्तीय वर्ष 2020-21 में दिसम्बर, 2020 तक योजना के अन्तर्गत ₹489.82 करोड़ की राशि व्यय की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना

यह योजना राजकीय अस्पतालों में आने वाले रोगियों को सम्पूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने एवं अन्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के रूप में "मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना' चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई है।
 यह योजना मात्र जांचों को निःशुल्क उपलब्ध करवाने के लिए ही नहीं, अपितु इस योजना के माध्यम से राजस्थान के समस्त राजकीय चिकित्सालयों पर जांच सेवाओं का सुदृढ़ीकरण भी किया गया है। 
◆ दिसम्बर, 2020 तक 34.26 करोड़ जांचें की जाकर 15.54 करोड़ लोगों को इस योजना में लाभान्वित किया जा चुका है। प्रतिदिन लगभग 1.25 से 1.50 लाख जांचे निःशुल्क की जा रही हैं।
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