• कठपुतली चित्र

    राजस्थानी कठपुतली नृत्य कला प्रदर्शन

Saturday, February 27, 2016

RSCIT Question Bank-RSCIT प्रश्न बैंक

 RSCIT Question Bank-RSCIT प्रश्न बैंक

साथियों कंप्यूटर से जुडी हुयी कुछ जानकारी दे रहा हूँ । क्योकि बहुत से परिक्षार्थी RSCIT की परिक्षा देगे । और कोर्स भी कर रहे हे आपके लिए ये प्रश्न कुछ काम आ सकते हे । आप इन प्रश्नों का पढ़ कर उत्तीर्ण हो सकते है । ये मात्र अनुमानित प्रश्न है इन प्रश्नो में से कोई भी प्रश्न अगर  पेपर में आते हे तो ये सहयोग मात्र है
1. सेविंग की प्रक्रिया है – मेमोरी से स्टोरेज माध्यम तक दस्तावेज कॉपी करना
2. डाइरेक्टरी के अंदर की डाइरेक्टरी को कहा जाता है – सब डाइरेक्टरी
3. C.A.D. का तात्पर्य है – कंप्यूटर एडेड डिजाइन
4. ओरेकल है – डाटाबेस सॉफ्टवेयर
5. असेम्बलर का कार्य है – असेम्बली भाषा को यंत्र भाषा में परिवर्तित करना
6. भारत में सर्वप्रथम दिखाई देने वाला कंप्यूटर वाइरस है – सी-ब्रेन
7. उस नेटवर्क टोपोलॉजी का क्या नाम है, जिसमें प्रत्येक संभावित नोड में द्विदिशीय कड़ियां हैं? – मेश
8. वह बिंदु जिस पर डाटा कंप्यूटर में प्रवेश करता है या निकलता है – टर्मिनल
9. विश्व का प्रथम कंप्यूटर नेटवर्क माना जाता है – ARPANET
10. लिनक्स एक उदाहरण है – ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का
11. पहले से चल रहे कंप्यूटर को रीस्टार्ट करना कहलाता है – रीबूटिंग
12. सॉफ्टवेयर कोड में त्रुटियां ढूंढ़ने की प्रक्रिया को कहा जाता है – डीबगिंग
13. सीपीयू का वह भाग जो अन्य सभी कंप्यूटर कंपोनेन्टस की गतिविधियों को कोआर्डिनेट करता है – कंट्रोल यूनिट
14. कंप्यूटर में जाने वाले डेटा को कहते हैं – इनपुट
15. कंप्यूटर में डेटा किसे कहा जाता है? – चिन्ह व संख्यात्मक सूचना को
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Wednesday, February 17, 2016

Adhivasis pilgrimage site of Ghotiya Ambaji-आदिवासियों की तीर्थ स्थल घोटिया आंबाजी का मेला

आदिवासियों की तीर्थ स्थली 'घोटिया आंबा' का मेला
पौराणिक महत्त्व की आदिवासियों की तीर्थ स्थली 'घोटिया आंबा' बाँसवाड़ा से
करीब 45 किमी दूर स्थित है। यह जिले की बागीदौरा पंचायत समिति के बारीगामा ग्राम पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आता है। यह तीर्थ पाण्डवकालीन माना जाता है। कहा जाता है कि यहाँ पाण्डवों ने अपने अज्ञातवास के दिन गुजारे थे। यहाँ स्थित कुंड को पाण्डव कुंड कहा जाता है। घोटिया आंबा में प्रतिवर्ष चैत्र माह में एक विशाल मेला लगता है जिसमें भारी संख्या में आदिवासी भाग लेते हैं। वेणेश्वर के पश्चात यह राज्य का आदिवासियों की दूसरा बड़ा मेला है। इस वर्ष घोटिया आंबा मेला 1 अप्रैल से प्रारंभ होकर 5 अप्रैल तक चला। दिनांक 3 अप्रैल को अमावस्या के अवसर पर मुख्य मेला भरा। इस मुख्य मेले में मेलार्थियों का भारी सैलाब उमड़ा और यहाँ घोटेश्वर शिवालय तथा मुख्यधाम पर स्थित अन्यदेवालयों व पौराणिक पूजा-स्थलों पर श्रृद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। वनवासियोंके इस धाम के प्रमुख मंदिर घोटेश्वर शिवालय के गर्भ गृह में पाटल वर्णी शिवलिंग के अलावा पांडवों के साथ देवी कुंती व भगवान कृष्ण की आकर्षक धवल पाषाण प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। इस अवसर पर मेलार्थियों ने आध्यामिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की रस्में व मान्यताएँ पूरी की और साधु-संतों के दर्शन किए।
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Marwar Ghudla Festival-मारवाड़ का घुड़ला त्यौहार

Marwar Ghudla Festival-मारवाड़ का घुड़ला त्यौहार

मारवाड़ का घुड़ला त्यौहार

मारवाड़ के जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर आदि जिलों में चैत्र कृष्ण सप्तमी अर्थात शीतला सप्तमी से लेकर चैत्र शुक्ला तृतीया तक घुड़ला त्यौहार मनाया जाता है। इस त्यौहार के प्रति बालिकाओं में ज्यादा उत्साह रहता है। घुड़ला एक छिद्र किया हुआ मिट्टी का घड़ा होता है जिसमें दीपक जला कर रखाहोता है। इसके तहत लड़कियाँ 10-15 के झुंड में चलती है। इसके लिए वे सबसे पहले कुम्हार के यहां जाकर घुड़ला और चिड़कली खरीद कर लाती हैं, फिर इसमें कील से छोटे-छोटे छेद करती हैं और इसमें दीपक जला कर रखती है। 

इस त्यौहार में गाँव या शहर की लड़कियाँ शाम के समय एकत्रित होकर सिर पर घुड़ला लेकर समूह में मोहल्ले में घूमती है। घुड़ले को मोहल्लें में घुमाने के बाद बालिकाएँ एवं महिलाएँ अपने परिचितों एवं रिश्तेदारों के यहाँ घुड़ला लेकर जाती है। घुड़ला लिए बालिकाएँ घुड़ला व गवर के मंगल लोकगीत गाती हुई सुख व समृद्धि की कामना करती है।जिस घर पर भी वे जाती है, उस घर की महिलाएँ घुड़ला लेकर आई बालिकाओं का अतिथि की तरह स्वागत सत्कार करती हैं।

साथ ही माटी के घुड़ले के अंदर जल रहे दीपक के दर्शन करके सभी कष्टों को दूर करने तथा घर में सुख शांति बनाए रखने की मंगल कामना व प्रार्थना करते हुए घुड़ले पर चढ़ावा चढ़ाती हैं। घुड़ले के शहर व गाँवों में घूमने का सिलसिला शीतला सप्तमी से चैत्र नवरात्रि के तीज पर आने वाली गणगौर तक चलता है। इस दिन गवर को घुड़ले के साथ विदाई दी जाती है। इन दिनों कई लड़कियों द्वारा परंपरा के अनुरूप गणगौर का उपवास भी रखा जाता है। घुड़ला नृत्य है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त घुड़ला लेकर घूमर एवं पणिहारी अंदाज किया जाने वाला घुड़ला नृत्य आज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। 

महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस नृत्य को प्रोत्साहित करने और इसके विकास कर इसे राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करने में जयपुर के कलाविद् मणि गांगुली, लोक कला मंडल उदयपुर के संस्थापक देवीलाल सामर तथा जोधपुर स्थित राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव पद्मश्री कोमल कोठारी (संस्थापक रूपायन संस्थान बोरून्दा, जोधपुर) का महत्वपूर्ण योगदान है जिससे यह राजस्थानी कला आमजन एवं देश विदेश में लोकप्रिय बनी।

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