Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2015

Rajasthan's Lok Devta and Lok Devi (लोक देवता एंव लोक देवियां) GK

Rajasthan's Lok Devta and Lok Devi (लोक देवता एंव लोक देवियां) 1. चौबीस बाणियां किस लोकदेवता से संवंधित पुस्तक/ ग्रन्थ है ? Ans: रामदेवजी 2. संत जसनाथजी का जन्म किस जिले में हुआ था (RAS 94,99) Ans: बीकानेर 3. भूरिया बाबा किसके आराध्य देवता है ? (RPSC 2nd GR 2010) Ans: मीणा 4. राजस्थान में भक्ति आन्दोलन के प्रणेता थे ? Ans: संत दादू 5. जाम्भो जी के अनुयायी कहलाते है (RPSC 2nd GR 2010, RAS 03) Ans: विश्नोई 6. लोक संत पीपाजी का विशाल मेला कंहाँ लगता है Ans: समदङी ग्राम में (बाङमेर) 7. किस संत के चमत्कारों से प्रसन्न होकर सिकंदर लोदी ने उन्हें जागीर प्रदान की ?(Patwari Hanumangarh 2011) Ans: जसनाथजी 8. भूमि के रक्षक देवता के रूप में किसे पूजा जाता है ? Ans: भौमिया जी 9. कबीर पंथी समुदाय का प्रमुख ग्रंथ है ? (B.ED. -03 ) Ans: कबीर वाणी 10. बल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है ? (RAS -89 , 92 ) Ans: नाथद्वारा 11. लोक देवता गोगाजी का प्रसिध्द मेला कंहाँ लगता है Ans: गोगामेङी, हनुमानगढ 12. तेजाजी का प्रमुख तीर्थ स्थान है ? (RPSC 2nd GR 2010) Ans: परबतसर

Rajasthan's leading animal development and reproduction center-राजस्थान के प्रमुख पशु विकास एवं प्रजनन केंद्र

1. भैंस प्रजनन केंद्र - वल्लभनगर (उदयपुर) 2. चारा बीज उत्पादन फार्म - मोहनगढ़ (जैसलमेर) 3. बतख, चूजा उत्पादन केंद्र - बांसवाड़ा 4. राष्ट्रीय पोषाहार संस्थान - जामडोली (जयपुर) 5. बकरी प्रजनन फार्म - रामसर (अजमेर) 6. षुकर प्रजनन फार्म - अलवर 7. बूलमदर फार्म - चादन गांव (जैसलमेर) 8. केंद्रीय पषु प्रजनन केद्र - सूरतगढ़ (गंगानगर) 9. राज्य कुंकुट फार्म - जयपुर 10. गौवंष संवर्द्धन फार्म - बस्सी (जयपुर) 11. राष्ट्री उष्ट्र अनुसंधान केंद्र - जोहड़बीड़ (बीकानेर) 12. पष्चिमी क्षेत्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र - अविका नगर (टोंक) 13. केंन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधन संस्थान - अविकानगर (टोंक) 14. नाली नस्ल भेड़ प्रजनन अनुसंधान  केंद्र  - हनुमानगढ़ 15. मगरा पुगल भेड़ प्रजनन अनुसंधान  केंद्र  - बीकानेर 16. राजस्थान भेड़ व ऊन प्रषिक्षण केद्र - जोधपुर 17. राजस्थान ऊन विष्लेषण प्रयोगषाला - बीकानेर 18. मुर्रा नस्ल भेड़ प्रजनन केंद्र - कुमेर (भरतपुर)

Introduction to Rajasthan-राजस्थान -एक परिचय

राजस्थान -एक परिचय राजस्थान हमारे देश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य हैं, जो हमारे देश के उत्तर-पश्चिम मे स्थित है। यह भू-भाग प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक कई मानव सभ्यताओ के विकास एवं पतन की स्थली रहा है। यहाँ पूरा-पाषाण युग, कांस्य युगीन सिंधु सभ्यता की प्राचीन बस्तियाँ, वैदिक सभ्यता एवं ताम्रयुगीन सभ्यताएँ खूब फली फूली थी। छठी शताब्दी के बाद राजस्थानी भू-भाग मे राजपुत राज्यो का उदय प्रारम्भ हुआ। जो धीरे धीरे सम्पूर्ण क्षेत्र मे अलग-अलग रियासतो के रूपमे विस्तृत हो गयी। ये रियासते राजपूत राजाओ के अधीन थी। राजपूत राजाओ की प्रधानता के कारण कालांतर मे इस सम्पूर्ण क्षेत्र को 'राजपूताना' कहा जाने लगा। वाल्मीकि ने राजस्थान प्रदेश को 'मरुकांतार' कहा है। राजस्थान शब्द का प्राचीनतम प्रयोग 'राजस्थानीयादित्य' वी.स. 682 मे उत्कीर्ण वसंतगढ़ (सिरोही) के शिलालेख मे उपलब्ध हुआ है। उसके बाद मुहणौत नैन्सी के ख्यात व रजरूपक में राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ है। परंतु इस भू-भाग के लिए राजपूताना शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1800 ई. मे जॉर्ज थॉमस द्वारा किया गया था। कर्नल

Forest Estate of Rajasthan - Types of Forests-राजस्थान की वन सम्पदा- वनों के प्रकार

वन-सरंक्षण की दिशा मेंप्रयास- राजस्थान में वन संरक्षण के लिए एकीकृत वन विभाग की स्थापना 1951 में की गई, तब राजस्थान के सभी वनों को नियमित वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत लिया गया और वनों की सीमा का सीमांकन किया गया। लगभगसभी वन-क्षेत्रों या फारेस्ट-ब्लॉक्स को राजस्थान वन अधिनियम 1953 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया । सन 1960 में जमीदारी उन्मूलन के साथ जागीर एवं जमीन वन राजस्थान वन विभाग के नियंत्रण मेंआ गए। जंगलों का वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए सभी वन प्रभागों के पास नियमित रूपसे कार्ययोजना है। राज्य के शुष्क परिस्थितियों तथा मरुस्थलीकरण को कम करने के लिए व्यापक वनीकरण योजनाओं रूप मेंअच्छी तरह से लागू की गई। राज्य के वनों की सामान्य विशेषताएं- राजस्थान का क्षेत्रफल नॉर्वे (3, 24,200 वर्गकिमी), पोलैंड (3, 12,600 वर्ग किमी) और इटली (3, 01,200 वर्गकिमी) जैसे कुछ पश्चिमी दुनिया के विकसित देशों के लगभगबराबर है। राजस्थान में वनों का कुल क्षेत्रफल 32,638.74 वर्ग किलोमीटर है जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 9.54% है। राजस्थान में वनक्षेत्र उत्तरी , दक्षिणी ,पूर्वी औरदक्षिण-पूर्वी भागों मेंअसम

Desert camel-रेगिस्थान का जहाज ऊँट

दूर तक फैला रेत का समंदर। इस रेत के समंदर में मनुष्य का हर क़दम पर साथ देता रेगिस्तान के जहाज के नाम से मशहूर ऊंट। विश्व में एक कूबड़ और दो कूबड़ वाले ऊंट पाये जाते हैं। भारत में ज़्यादातर एक कूबड़ वाले ऊंट ही देखने को मिलते हैं। हालांकि ऊंट को भी दूसरे जानवरों की तरह नियमित रूप से भोजन और पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी विशेषता यह होती है कि यह 21 दिन तक बिना पानी पिये चल सकता है। इसकी पीठ पर जो कूबड़ होता है वह चर्बी का भंडार होता है। इसमें जमा चर्बी को यह ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल कर लेता है। रेगिस्तान में ऊंट मनुष्य के सुख-दु:ख का सहभागी बनकर उसके सभी कार्यों, जैसे परिवहन, खेती, सेना की गश्त, दूध, गोश्त की पूर्ति करता है। राजस्थान की संस्कृति में यह गहरे तक प्रवेश किये हुए है। भारत में लगभग 75 प्रतिशत आबादी सिर्फ राजस्थान में है। अपना मार्ग याद रखने की क्षमता, 15 किमी. प्रति घंटे से लेकर 65 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। बीकानेर में ऊंट मेला लगता है और यहां पर ऊंट अनुसंधान केंद्र भी खुला है। आज ऊंटनी के दूध की उत्पादन क्षमता लगभग 1500 लाख लीटर है। ऊंटनी के दूध क

High Places of Rajasthan-राजस्थान के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. हवामहल – जयपुर 2. जंतर मंतर – जयपुर 3. गलता जी – जयपुर 4. आमेर किला – आमेर, जयपुर 5. बिड़ला तारामंडल – जयपुर 6. सरगासूली (ईसर लाट) – जयपुर (RPSC Exam) 7. गेटोर की छतरियां – जयपुर 8. नाहरगढ़ – जयपुर 9. गोविन्दजी का मंदिर – जयपुर 10. मुबारक महल – जयपुर (RPSC Exam) 11. आभानेरी मंदिर – दौसा 12. सोनीजी की नसियाँ – अजमेर 13. ढाई दिन का झोंपड़ा – अजमेर 14. दौलत बाग – अजमेर 15. अकबर का किला – अजमेर 16. दरगाह शरीफ् – अजमेर 17. ब्रह्मा मंदिर – पुष्कर 18. नव ग्रह मंदिर – किशन गढ़ 19. सास-बहू के मंदिर ( प्राचीन नागदा के मंदिर) – कैलाशपुरी, उदयपुर 20. सहेलियों की बाड़ी – उदयपुर 21. सज्जनगढ़ – उदयपुर 22. आहड़ संग्रहालय – उदयपुर 23. जगत के प्राचीन मंदिर – जगत गाँव उदयपुर 24. कुम्भा श्याम मंदिर – उदयपुर 25. द्वारकाधीश मंदिर – कांकरोली राजसमंद 26. कुंभलगढ़ – केलवाड़ा राजसमंद 27. श्रीनाथजी मंदिर – नाथद्वारा, राजसमंद 28. विजय स्तम्भ – चित्तौड़ 29. कीर्ति स्तम्भ – चित्तौड़ 30. रानी पद्मनी महल – चित्तौड़गढ़ 31. सांवलिया जी मंदिर – मंडफिया, चित्तौड़गढ़ 32. विनय निवास महल

Lok Devata kalla ji rathod-लोक देवता कल्ला जी राठौड़

लोक देवता कल्ला जी राठौड़ का जन्म विक्रम संवत 1601 में दुर्गाष्टमी को नागौर जिले के मेड़ता शहर में हुआ था। वे मेड़ता रियासत के राव जयमल राठौड़ के छोटे भाई आस सिंह के पुत्र थे। भक्त कवयित्री मीराबाई इनकी बुआ थी। इनका बाल्यकाल मेड़ता में ही व्यतीत हुआ लेकिन बाद में वे चित्तौड़ दुर्ग में आ गए। वे अपनी कुल देवी नागणेचीजी माता के भक्त थे। कल्ला जी प्रसिद्ध योगी संत भैरव नाथ के शिष्य थे। माता नागणेची की भक्ति के साथ साथ वे योगाभ्यास भी करते थे। कल्लाजी ने औषधि विज्ञान की शिक्षा भी प्राप्त की थी। ये चार हाथों वाले देवता के रूप में प्रसिद्ध है। इनकी मूर्ति के चार हाथ होते हैं। इनकी वीरता की कथा बड़ी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि सन 1568 में अकबर की सेना ने चितौड़ पर कब्जा करने के लिए किले को घेर लिया। लम्बे समय तक सेना जब दुर्ग को घेरे रही तो किले के अंदर की सारी रसद समाप्त हो गई। तब सेनापति जयमल राठौड़ ने केसरिया बाना पहन कर शाका करने तथा क्षत्राणियों ने जौहर करने का निश्चय किया। फिर क्या था, किले का दरवाजा खोल कर चितौड़ की सेना मुगलों पर टूट पड़ी। युद्ध में सेनापति जयमल राठौड़ पैरों में घाव होने से घ

इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा

इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी तो गढ़ रा मालक सा इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा जेठजी तो घर रा पाटवी सा म्हारा जेठानी तो घर रा मालक सा इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारो देवरियो तो तारा बिचलो चंदो सा महरी द्योरानी तो आभा माय्ली बीजळी सा इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सायब्जी तो दिल रा राजवी सा म्हें तो सायब्जी रे मनडे री राणी सा इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लह