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Showing posts from October, 2015

SUVRNA GIRI JALORE FORT-सुवर्ण गिरि दुर्ग ( जालोरदुर्ग)

सुवर्ण गिरि दुर्ग ( जालोर दुर्ग) ,JALORE FORT यह दुर्ग मारवाङ मे सुकङी नदी के दाहीने किनारे कनकाचल सुवर्ण गिरी पहाङी पर स्थित हैं।ङाँ दशरथ शर्मा के अनुसार प्रतिहार नरेश नागभटट् प्रथम ने इस दुर्ग का निर्माण करवाया था । वीर कान्हडदेव सोनगरा और उसके पुत्र वीरमदेव अलाउद्दीन खिलजी के साथ जालौर दुर्ग में युध्द करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तथा 1311-1312ई.के लगभग खिलजी ने जालौर पर अधिकार किया । इस युध्द का वर्णन कवि पद्मनाभ द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ' कान्हङदे प्रबंध ' तथा ' वीरमदेव सोनगरा री बात ' मे किया गया हैं। जालौर दुर्ग अपनी.सुदृढता के कारण संकटकाल मे जहाॅ मारवाङ के राजाओ का आश्रय स्थल रहा वही इसमे राजकीय कोष भी रखा जाता रहा ।संत मल्लिक शाह की दरगाह तथा दुर्ग मे स्थित परमार कालीन कीर्ति स्तम्भ जैन धर्मावलम्बियो की आस्था का केन्द्र प्रसिद्ध ' स्वर्णगिरी ' मंदिर ,तोपखाना आदि जालौर दुर्ग के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं।

जाने जयपुर के गुलाल गोठे के बारेमें

वैसे नाम से तो लगता है कि गुलाल गोठा कोई मिठाई का नाम हैं ।पर यह मिठाई है नही ।तो फिर है क्या और इसका क्या प्रयोग होता हैं और कैसे बनता है जाने आज की इस पोस्ट में गुलाल गोठा, लाख को गरम करके उसे फुला कर गेंद का आकार देकर उसमे गुलाल भर कर बनाया जाता हैं।पुराने समय मे जयपुर के राजा महाराजा अपनी जनता के साथ होली खेलने के लिए इसका प्रयोग करते थे।राजा जनता पर इस गुलाल गोठे को फेकते जिससे इसके अन्दर का गुलाल बाहर निकल कर जनता पर लग जाता ।इस प्रकार जनता राजा के साथ होली खेल कर बडी प्रसन्न होती थी । गुलाल गोठे कि खासियत यह है कि इससे किसी पर फेकने पर बिना चोट लगे यह फुट जाता हैं और इसके अन्दर का गुलाल बाहर निकल जाता हैं।समय के साथ इसका प्रयोग घटता जा रहा हैं पर आज भी होली के समय जयपुर कि विशेष पहचान बना हुआ हैं।जयपुर मे मनिहारो कि गली मे मुस्लिम समुदाय के लोगो के द्वारा इसे बनाया जाता हैं और यह उनकी रोजी रोटी का एक जरिया हैं।

(SpecialEconomic Zones-SEZ in Rajasthan)-राजस्थान में विशेष आर्थिक क्षेत्र

राजस्थान की दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पश्चिमी तट के बंदरगाहों से समीपता इस राज्य को निर्यात-उन्मुख औद्योगिक विकास के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर का 40% भाग राजस्थान से गुजरता है जो यहाँ इस कॉरिडोर में विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में औद्योगिक बेल्ट के विकास के लिए भारी संभावनाएं उत्पन्न करता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा निर्मित करने तथा उद्योगों के लिए परेशानी मुक्त वातावरण प्रदान करने में सक्षम बनाने हेतु विशेष रूप से चिह्नित आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का है।सरकार द्वारा रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, ऊनी कालीन आदि क्षेत्रों में राज्य की अंतर्निहित क्षमता का दोहन करने के लिए ''उत्पाद विशिष्ट विशेष आर्थिक क्षेत्रों'' के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। 165.15 अरब के निवेश की उम्मीद के साथ छह विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को पहले से ही अधिसूचित किया जा चुका है जो निम्नांकित हैं- 1. महिंद्रा वर्ल्ड सिटी (जयपुर) लिमिटेड, जयपुर 2. सोमानी वर्स्टेड लिमिटेड, खुशखेडा, भिवाड़ी