Skip to main content

पालनहार योजना - राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजना (Palanbhar Yojana)

पालनहार योजना - राजस्थान  सरकार की  जनकल्याणकारी योजना 

यह योजना राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के 0 से 18 वर्ष तक के विशेष देखभाल एवं संरक्षण वाले बालक/ बालिकाओं की विभिन्न श्रेणियों के लिये है। इसके तहत् आने वाले बालक/बालिकाओं की देखनाल एवं पालन-पोषण की व्यवस्था परिवार के अन्दर किसी निकटम रिश्तेदार/परिचित व्यक्ति के द्वारा किया जाता है। बालक/बालिकाओं के देखभाल करने वाले को पालनहार कहा गया है। बालक/बालिकाओं के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है।

पात्र बालक/बालिका की श्रेणी

●  अनाथ बच्चे

●  मृत्यु  दण्ड/ आजीवन कारावास प्राप्त प्राप्त माता/पिता के बच्चे

●  निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के तीन बच्चे

●  पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे

●  एच.आई.वी./एड्स पीडित माता/पिता के बच्चे

●  कुष्ठ रोग से पीडित माता/पिता के बच्चे

●  नाता जाने वाली माता के तीन बच्चे

●  विशेष योग्यजन माता/पिता के बच्चे

●  तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे

श्रेणीवार आवश्यक दस्तावेज

●  माता-पिता के मृत्यु प्रमाण-पत्र की प्रति  - (अनाथ बच्चे )

●  दण्डादेश की प्रति -(मृत्यु  दण्ड/ आजीवन कारावास प्राप्त प्राप्त माता/पिता के बच्चे)

●  विधवा पेशन गुगतान आदेश (पी.पी.ओ.) की प्रति -(निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के तीन बच्चे)

●  पुनर्विवाह के प्रमाण पत्र की प्रति -(पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे)

●  ए.आर.टी. सेन्टर द्वारा जारी ए.आर.डी. डायरी/ग्रीन कार्ड की प्रति -(एच.आई.वी./एड्स पीडित माता/पिता के बच्चे)

●  सक्षम बोर्ड द्वारा जारी किये गये चिकित्सा प्रमाण पत्र की प्रति -(कुष्ठ रोग से पीडित माता/पिता के बच्चे)

●  नाता गये हुए एक वर्ष से अधिक समय होने का प्रमाण -(नाता जाने वाली माता के तीन बच्चे)

●  40 प्रतिशत या अधिक निःशक्तता के प्रमाण पत्र की प्रति -(विशेष योग्यजन माता/पिता के बच्चे)

●  तलाकशुदा/परित्यक्ता पेंशन भुगतान आदेश (पी.पी.ओ.) की प्रति-(तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे)

पालनहार द्वारा जमा करवाये जाने वाले अन्य आवश्यक दस्तावेज

●  पालनहार का "भामाशाह कार्ड/जनआधार कार्ड "

●  पालनहार का "आय प्रमाण पत्र" (विधवा/ परित्यक्ता/तलाकशुदा एवं बी.पी.एल. श्रेणी में आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है)

●  "मूल निवास प्रमाण पत्र" की प्रति

●  बच्चे का "आधार कार्ड"

●  बच्चे का "आंगनवाडी केन्द्र पर पंजीकरण/विद्यालय में अध्यनरत् होने का प्रमाण पत्र

●  अनाथ बच्चों का पालन-पोषण करने का प्रमाण पत्र" (जिनके माता-पिता की नृत्यु हो गई हो अथवा न्यायिक प्रक्रिया द्वारा मृत्युदण्ड/ आजीवन कारावास से दण्डित किए गए हो अथवा जिनकी विधवा माता ने विधिवत पुनर्विवाह के पश्चात अपनी संतानों को त्याग दिया हो, के लिये ही उक्त प्रमाण पत्र की पूर्ति कराई जानी है)

अनुदान राशि 

●  0-6 वर्ष तक - 500 रुपये प्रतिमाह (0-3 वर्ष तक के बालक/बालिका का आगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकरण/शाला पूर्व शिक्षा हेतु | विद्यालय में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है तथा 3-8 वर्ष तक के बालक/बालिका का आंगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकरण/शाला पूर्व शिक्षा हेतु विद्यालय में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है)

●  8-18 वर्ष तक - 1000 रुपये प्रतिमाह (बालक/बालिका का विद्यालय/व्यवसायिक शिक्षा हेतु किसी संस्थान में जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य| 2000 रुपये वार्षिक अतिरिक्त एकमुश्त देय (विधवा पालनहार व नाता पालनहार में देय नहीं)

पात्रता

 पालनहार का वार्षिक आय रू. 1.20 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए

 एवं बच्चे कम से कम 3 वर्ष से राजस्थान राज्य में निवासरत हो

आवेदन प्रक्रिया

●  ई-मित्र कियोस्क केन्द्र पर संपर्क करें

संपर्क सूत्र :-

●   संबंधित जिला कार्यालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में संपर्क करें 
●   अधिक जानकारी हेतु निदेशालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जयपुर (राज)/फोन नम्बर 0141-2226604/वेबसाईट  www.sje.rajasthan.gov.in

आवश्यक निर्देश :-

●  बच्चे का "आंगनवाडी केन्द्र पर पंजीकरण / विद्यालय में अध्यनरत् होने का प्रमाण पत्र" प्रति वर्ष माह जुलाई में ई-मित्र कियोस्क के माध्यम से अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा अन्यथा पालनहार योजनान्तर्गत देय राशि का भुगतान माह जुलाई से रोक दिया जायेगा।

●  पालनहार का भामाशाह कार्ड अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है अत: पालनहार को भामाशाह कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। (पालनहार का मोबाईल नम्बर भामाशाह कार्ड में दर्ज नहीं होने/मोबाईल नम्बर होने/नोबाईल नम्बर बदले जाने की स्थिति अथवा पालनहार की किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत सूचना जैसे पालनहार का नाम, जन्म तिथि, बैंक खाता संख्या आदि में अद्यतन (Update) करवाने की स्थिति में उक्त सूचना नागाशाह कार्ड में अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा)

●  बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है। अतः पालनहार को बच्चे का आधार कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा तथा बच्चे का बायोमेट्रीक अथवा ओ.टी.पी. (One Time Password) के माध्यम से सत्यापन करवाना होगा (बच्चे का आधार कार्ड में मोबाईल नम्बर दर्ज नहीं होने/मोबाईल नम्बर बंद/मोबाईल नम्बर बदले जाने की स्थिति अथवा बच्चे का किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत सूचना जैसे बच्चे का नाम, जना तिथि आदि में अद्यतन (Update) करयाने की स्थिति में उक्त सूचना आधार कार्ड में अद्यतन (Update) करवाना अनिवार्य होगा)

Comments

Popular posts from this blog

" पोमचा "- राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी

"पोमचा" - राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी राजस्थान में स्त्रियों की ओढ़नियों मे तीन प्रकार की रंगाई होती है- पोमचा, लहरिया और चूंदड़। पोमचा पद्म या कमल से संबद्ध है, अर्थात इसमें कमल के फूल बने होते हैं। यह एक प्रकार की ओढ़नी है।वस्तुतः पोमचा का अर्थ कमल के फूलके अभिप्राय से युक्त ओढ़नी है। यह मुख्यतः दो प्रकार से बनता है- 1. लाल गुलाबी 2. लाल पीला। इसकी जमीन पीली या गुलाबी हो सकती है।इन दोनो ही प्रकारों के पोमचो मेंचारो ओर का किनारा लाल होता है तथा इसमें लाल रंगसे ही गोल फूल बने होते हैं। यह बच्चे के जन्म के अवसर पर पीहर पक्ष की ओरसे बच्चे की मां को दिया जाता है।पुत्र का जन्म होने पर पीला पोमचा तथा पुत्री के जन्म पर लाल पोमचा देने का रिवाज है। पोमचा राजस्थान मेंलोकगीतों का भी विषय है।पुत्र के जन्म के अवसर पर "पीला पोमचा" का उल्लेख गीतों में आता है। एक गीत के बोल इस तरह है-                          "पोमचा" - राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी " भाभी पाणीड़े गई रे तलाव में, भाभी सुवा तो पंखो बादळ झुकरया जी।      देवरभींजें तो भींजण दो ओदेवर और रंगावे म्हा

World famous sword of Sirohi-विश्व विख्यात सिरोही की तलवार

सिरोही की तलवार को पहचान दिलाने वाले परिवार में सबसे बुजुर्ग प्यारेलाल के हाथों में आज भी वह हुनर मौजूद है जो पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें मिलता रहा और जिसकी बदौलत सिरोहीं की तलवार को देश दुनिया में पहचान मिली | 62 वर्षीय प्यारेलाल कई सालों से तलवारें बना रहे है , लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता है वे तलवार को ढालने लगते है |आज भी लोहे पर ऐसी सटीक चोट करते है की तलवार की धार वैसी ही जैसी कई सालों पहले रहा करती थी |लोग आज भी उन्हें ढूंढते हुए उस गली तक आ पहुचते हैं जहाँ प्यारेलाल तलवार बनाने का काम  करते हैं |पिता की ढलती उम्र और साथ छोड़ते स्वास्थ्य के कारण अहमदाबाद में रहने वाले बेटे ने भी कई बार कहा की आप मेरे साथ चलिए ,लेकिन वे नहीं माने|कहा की जब तक हिम्मत है ये तलवारे बनाता रहूँगा |गौरतलब है की प्यारेलाल इतिहास  की स्वर्णिम पन्नों में दर्ज सिरोही की प्रसिद्ध तलवारे में माहिर परिवार के आखिरी शिल्पकार है |जो रियासत काल से ही तलवार बनाते आ रहे हैं | इस खासियत की वजह से मिली प्रसिधी   सिरोही तलवार की यह खासियत है की आज के मशीनी युग में भी लोहे को गर्म करके सिर्फ हथौड़े की सहायता से तैय

लोक देवता पाबूजी राठौड़ का जीवन परिचय(LOKDEVTA PABU JI RATHORE)

लोक देवता पाबूजी राठौड़ का जीवन परिचय(LOKDEVTA PABU JI RATHORE) !! सूरवीर गौ रक्षक वीर श्री पाबूजी राठौड़  !! सोढी छोड़ी बिल्खती , माथै सावण मौड़ । अमला वैला आपने ,रंग है पाबुजी राठौड़।। ●  राव सिहाजी "मारवाड में राठौड वंश के संस्थापक " उनके तीन पुत्र थे । राव आस्थानजी, राव अजेसीजी, राव सोनगजी ! ●  राव आस्थानजी के आठ पूत्र थे ! राव धुहडजी, राव धांधलजी, राव हरकडजी,राव पोहडजी, राव खिंपसिजी, राव आंचलजी,राव चाचिंगजी, राव जोपसाजी ! ●  राव धांधलजी राठौड़ के दो पुत्र थे ! बुढोजी और पाबुजी ! ●  श्री पाबूजी राठौङ का जन्म 1313 ई में कोळू ग्राम में हुआ था ! कोळू ग्राम जोधपुर में फ़लौदी के पास है । धांधलजी कोळू ग्राम के राजा थे, धांधल जी की ख्याति व नेक नामी दूर दूर तक प्रसिद्ध थी । ●  एक दिन सुबह सवेरे धांधलजी अपने तालाब पर नहाकर भगवान सूर्य को जल तर्पण कर रहे थे । तभी वहां पर एक बहुत ही सुन्दर अप्सरा जमीन पर उतरी ! राजा धांधल जी उसे देख कर उस पर मोहित हो गये, उन्होने अप्सरा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा । ●  जवाब में अप्सरा ने एक वचन मांगा कि राजन ! आप जब भी मेरे कक्ष में प्रवेश करोगे तो स