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माउंट आबू हिल स्टेशन "राजस्थान का कश्मीर" Mount Abu

माउंट आबू हिल स्टेशन "राजस्थान का कश्मीर" Mount Abu

माउंट आबू हिल स्टेशन "राजस्थान का कश्मीर"

प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू, जिसे राजस्थान का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान है।पर्यटकों के बढ़ते रूझान को देखते हुए यहां पर नए पर्यटक स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं। 2019 में 29 साल बाद सेल्फी पाइंट के रूप में 18वां पर्यटक स्थल स्थपापित किया गया था और इसके बाद 101 फीट ऊंचा तिरंगा लगाया गया, जो जिले का सबसे बड़ा तिरंगा था। नक्की झील से लेकर गुरु शिखर तक की वादियों पर्यटकों को पसंद आ रही है। माउंटआबू में नक्कीलेक, टॉड रॉक, हनीमून पाइंट, गौरव पथ, अधरदेवी, देलवाड़ा जैन मंदिर, गुरु शिखर, सनसेट पाइंट, रसिया बालम, पांडव गुफा, नीलकंठ मंदिर, शंकर मठ, रघुनाथ मंदिर, ओम शांतिभवन व ब्रह्मकुमारी म्यूजियम समेत कुल 18 टूरिस्ट पॉइंट हैं।

गुरु शिखर

गुरु शिखर अरावली पर्वत शृंखला अर्बुदा पहाड़ों में एक चोटी है जो अरावली पर्वत माला का उच्चतम बिंदु है यह 1722 मीटर एवं 5676 फीट की ऊंचाई पर है। इस मंदिर की शांति भवन का सफेद रंग एवं यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय को समर्पित है। इसके पास चामुंडा मंदिर शिव मंदिर और मीरा मंदिर भी शामिल है। गुरु दत्तात्रेय को भगवान विष्णु का अवतार माने जाते है, जिसके चलते यह मंदिर बहुत पवित्र स्थान पर है।

अचलगढ़ मंदिर

अचलगढ़ किला मेवाड़ के राजा राणा कुम्भा ने पहाड़ी के ऊपर पहाड़ी के तल पर 15वीं शताब्दी में बनाया था।  मंदिर की विशेषता है कि अचलेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित माना जाता है यहां भगवान शिव के पैरों के निशान हैं। यहां शिवणी के अगूठे की पूजा होती है। अचलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे के निशान मौजूद थे। स्थानीय लोग बताते हैं कि भगवान शिव का विशेष जलाभिषेक होता है जो बहुत खास है।

देलवाड़ा जैन मंदिर

देलवाड़ा मंदिर सबसे अद्भुत  मंदिरों में से एक है जिसकी विशेषता है कि यह पांच मंदिरों का एक समूह है। इसका निर्माण 11वीं और 13वों शताब्दी के मध्य हुआ था। यह मंदिर जैन धर्म के  तीर्थकरों को समर्पित है देलवाड़ा के मंदीरों में विमलवसही मंदिर प्रथम तीर्थकर को समर्पित है जो 1031 ईस्वी में बना था। मंदिर में  लगभग 48 स्तंभों में नृत्यांगना की आकृति बनी हुई है। आदिनाथ की मुर्ति की आंखें बहुमुल्य आभूषणों व रत्नों से  बनी है।

अधरदेवी मंदिर

कात्यायिनी शक्ति पीठ अर्बुदा मंदिर माउंट आबू का सबसे पुराना एवं प्रसिद्ध मंदिर है। ये देश के 52 शक्तिपीठों में छठा शक्तिपीठ है। अर्बुदादेवी देवी दुर्गा के नौ रूपों में से कात्यायिनी का रूप है, जिसकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन होती है। माना जाता है कि भगवान शंकर के तांडव के समय माता पार्वती के अधर यहीं पर गिरा था इसलिए इसे अधरदेवी के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर करीब साढ़े पांच हजार साल पुराना है।

नक्की लेक

इसे माउंट का ह्दय स्थल भी कहा जाता है। राजस्थान की सबसे ऊंची झीलों में यह एक है। मान्यता है कि किसी देवता ने अपने नाखूनों से खोदकर यह झील बनाई थी। इसीलिए इसे नक्की, नख या नाखून नाम से जाना जाता है। धार्मिक रूप से भी इसका महत्व यह है कि कार्तिक पूर्णिमा पर इसमें लोग स्नान कर लाभ लेते हैं। यहां की नौकायान के साथ इसके आस-पास बसा बाजार इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है।

सेल्फी पॉइंट

माउंट आने वाले पर्यटकों को टूरिस्ट सेल्फी पॉइंट नाम का नया पर्यटन स्थल विकसित किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यहां से नक्की झील के साथ ही हनीमून पॉइंट की पहाड़ियां भी नजर आती हैं। यहां से सेल्फी भी बेहद खूबसूरत बनती है। इससे पहले 1990 से पूर्व बना पर्यटकों के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान की ओर से बनाया गया था। इसके बाद 29 साल बाद इसे 18वें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया गया था।

नेशनल पार्क

नक्की झील पर स्थित समुद्र तल से सबसे ऊंचा 102 फीट ऊंचा तिरंगा माउंट आबू शहर में राम जानकी बाग के समीप लहराता हुआ पर्यटकों को आकर्षित करता है। 7 अक्टूबर 2019 को उद्घाटन हुआ, तब से यहां तिरंगा लहरा रहा है। नक्की झील, गौरव पथ और स्वामी विवेकानंद पार्क के पास बना यह स्थल अपने आप में अलग है, यहां आने वाले पर्यटकों की पसंद बना हुआ है। समुद्र तल से झंडे की कुल ऊंचाई करीब 4104 फीट है।

अद्भुत रॉक

माउंट के मौसम की तरह यहां मिलने वाली रॉक यानी, पहाड़ियों के कुछ हिस्से भी अपने आप में अद्भुत है। कुछ रॉक ऐसी हैं जो हुबहू जानवरों जैसी दिखती है। खास बात यह है कि जिस जानवर की तरह यह दिखती है उसी के अनुसार इनके नाम भी हैं। इनमें टोड रॉक, धोती खेड़ा रॉक और एलिफेंट रॉक मशहूर है। यह रॉक या तो ट्रेकिंग के लिए या फिर सेल्फी पॉइंट के लिए पर्यटकों में खास जगह बनाती है। दूसरी खास बात यह है कि इस तरह की चट्टानें या रॉक पूरे प्रदेश में केवल माउंट में ही देखने को मिलेगी। मदर रॉक पर तो जैसे एक मां की प्रतिकृति देखने को मिलती है।

इतने प्रकार की है रॉक

एलीफैंट रॉक, जो दिखती है हाथी की तरह 

एलीफेंट रॉक गुरु शिखर के नीचे एवं उत्तक के समीप हाथी के आकार जैसी चट्टान है। जिसमें आंख, सुंड, कान व शरीर हाथी के आकार जैसा दिखाई दे रहा है।

मदर रॉक, मां की ममता का प्रतीक 

मदर रॉक हनीमून पॉइंट के समीप है जिसमें एक बड़ी सी चट्टान महिला की आकृति लिए है और जैसे अपने बच्चे को देखते हुए दिख रही है। यह हनीमून पॉइंट की फेमस रॉक है। जिसे मदर रॉक कहा जाता है।

टोड रॉक,जो ट्रैकिंग के लिए मशहूर 

नक्की झील के समीप ऊपर पहाड़ पर एक मेंढक की आकृति जैसी चट्टान है जो टोड रॉक के नाम से सुप्रसिद्ध है। यह ट्रेकिंग के लिए मशहूर है और यहां ट्रेनिंग भी दी जाती है।

धोती खेड़ा रॉकः 

गोमुख पार्किंग के समीप धोती खेड़ा के नाम से प्रसिद्ध रॉक है जो एक के ऊपर एक के ऊपर बनी हुई है। इसे आम लोगों ने धोती खेड़ा का नाम दिया है और यह बहुत पुरानी चट्टान है।

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