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इसरो के विभिन्न केंद्र एवं प्रतिष्ठान

इसरो के विभिन्न केंद्र एवं प्रतिष्ठान


● विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम

● इसरो उपग्रह केंद्र, बंगलुरू

● सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा 

● अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद

● राष्ट्रीय प्राकृतिक अनुसंधान प्रबंधन तंत्र

● भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान

● सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला

● अंतरिक्ष कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बंगलुरू 

● विकास एवं शैक्षणिक संचार इकाई, अहमदाबाद

● उत्तर-पूर्व अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, शिलांग

● इनसैट प्रधान नियंत्रण सुविधा, हासन

● राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला

● इसरो जड़त्वीय तंत्र इकाई, बंगलुरू

● भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद

● राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद

● रीजनल सुदूर संवेदन सेवा केंद्र

● द्रव नोदन तंत्र केंद्र, महेन्द्र गिरि

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World famous sword of Sirohi-विश्व विख्यात सिरोही की तलवार

सिरोही की तलवार को पहचान दिलाने वाले परिवार में सबसे बुजुर्ग प्यारेलाल के हाथों में आज भी वह हुनर मौजूद है जो पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें मिलता रहा और जिसकी बदौलत सिरोहीं की तलवार को देश दुनिया में पहचान मिली | 62 वर्षीय प्यारेलाल कई सालों से तलवारें बना रहे है , लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता है वे तलवार को ढालने लगते है |आज भी लोहे पर ऐसी सटीक चोट करते है की तलवार की धार वैसी ही जैसी कई सालों पहले रहा करती थी |लोग आज भी उन्हें ढूंढते हुए उस गली तक आ पहुचते हैं जहाँ प्यारेलाल तलवार बनाने का काम  करते हैं |पिता की ढलती उम्र और साथ छोड़ते स्वास्थ्य के कारण अहमदाबाद में रहने वाले बेटे ने भी कई बार कहा की आप मेरे साथ चलिए ,लेकिन वे नहीं माने|कहा की जब तक हिम्मत है ये तलवारे बनाता रहूँगा |गौरतलब है की प्यारेलाल इतिहास  की स्वर्णिम पन्नों में दर्ज सिरोही की प्रसिद्ध तलवारे में माहिर परिवार के आखिरी शिल्पकार है |जो रियासत काल से ही तलवार बनाते आ रहे हैं | इस खासियत की वजह से मिली प्रसिधी   सिरोही तलवार की यह खासियत है की आज के मशीनी युग में भी लोहे को गर्म करके सिर्फ हथौड़े की सहायता से तैय

" पोमचा "- राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी

"पोमचा" - राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी राजस्थान में स्त्रियों की ओढ़नियों मे तीन प्रकार की रंगाई होती है- पोमचा, लहरिया और चूंदड़। पोमचा पद्म या कमल से संबद्ध है, अर्थात इसमें कमल के फूल बने होते हैं। यह एक प्रकार की ओढ़नी है।वस्तुतः पोमचा का अर्थ कमल के फूलके अभिप्राय से युक्त ओढ़नी है। यह मुख्यतः दो प्रकार से बनता है- 1. लाल गुलाबी 2. लाल पीला। इसकी जमीन पीली या गुलाबी हो सकती है।इन दोनो ही प्रकारों के पोमचो मेंचारो ओर का किनारा लाल होता है तथा इसमें लाल रंगसे ही गोल फूल बने होते हैं। यह बच्चे के जन्म के अवसर पर पीहर पक्ष की ओरसे बच्चे की मां को दिया जाता है।पुत्र का जन्म होने पर पीला पोमचा तथा पुत्री के जन्म पर लाल पोमचा देने का रिवाज है। पोमचा राजस्थान मेंलोकगीतों का भी विषय है।पुत्र के जन्म के अवसर पर "पीला पोमचा" का उल्लेख गीतों में आता है। एक गीत के बोल इस तरह है-                          "पोमचा" - राजस्थान की एक प्रकार की ओढ़नी " भाभी पाणीड़े गई रे तलाव में, भाभी सुवा तो पंखो बादळ झुकरया जी।      देवरभींजें तो भींजण दो ओदेवर और रंगावे म्हा

राजस्थान के प्रमुख अनुसंधान केन्द्रो के नाम

1. राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र - सेवर जिला भरतपुर 2. केन्द्रीय सूखा क्षेत्र अनुसंधान संस्थान - CAZRI- जोधपुर 3. केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान - अविकानगर जिला टौंक 4. केन्द्रीय ऊँट अनुसंधान संस्थान - जोहड़बीड़, बीकानेर 5. अखिल भारतीय खजूर अनुसंधान केन्द्र - बीकानेर 6. राष्ट्रीय मरुबागवानी अनुसंधान केन्द्र - बीकानेर 7. राष्ट्रीय घोड़ा अनुसंधान केन्द्र - बीकानेर 8. सौर वेधशाला - उदयपुर 9. राजस्थान कृषि विपणन अनुसंधान संस्थान - जयपुर 10. केन्द्रीय पशुधन प्रजनन फार्म - सूरतगढ़ जिला गंगानगर 11. राजस्थान राजस्व अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान - अजमेर 12. राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान - उदयपुर 13. सुदूर संवेदन केन्द्र - जोधपुर 14. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं सर्वेक्षण संस्थान - उदयपुर 15. राष्ट्रीय मसाला बीज अनुसंधान केन्द्र - अजमेर 16. राष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान - जयपुर 17. केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग शोध संस्थान (सीरी) - पिलानी 18. अरबी फारसी शोध संस्थान - टौंक 19. राजकीय शूकर फार्म - अलवर 20. केन्द्र